टीकमगढ़। किसी की बहिन की शादी नहीं हो रही है, तो किसी के परिवार में हो रही है अकाल मौतें, किसी को है लाइज बीमारियां समस्याएं अनेक निदान एक बाबा बागेश्वर धाम के बाला जी सरकार। पैसी करो हाजरी लगाओ विनती करो और समस्याएं करो दूर। यह अद्भुत नजारा देखने वाले हजारों लाखों लोग संतश्री पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के श्रीमुख से समस्याओं के बारे में जहां जान रहे थे तो वहीं वह उनकी समस्याओं के निदान का उपाये भी बता रहे थे। यहां आज दो दिवसीय दरवार के पहले दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने हजारों लोगों के कल्याण के लिये भगवान बालाजी सरकार से दुआ की और अपना आशीर्वाद दिया। दरवार में पंडाल लोगों से खचाखच भरा रहा। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु थिरकते रहे। सुबह नौ बजे ही पंडाल खचाखच भर चुका था। हालांकि आज का दरवार कुछ देरी से लगा। दरवार में कोने-कोने से लोग आए हुये थे। दरवार में गुरूदेव ने कहा कि लोगों को हनुमानजी से जुडऩे की जरूरत है यदि वह सीधे हनुमान जी की उपासना करें और व्यसनों का त्याग करें तो बागेश्वर धाम अपने घर में ही पायेंगे। उन्होंने लोगों को अपने अंदाज में फटकार भी लगाई। सनातनी लोगों से उन्होंने अपील की है कि सभी खुद को हनुमान जी को सौंप दें फिर भगवान उनकी जरूर सुनेंगे। बागेश्वर धाम आने वाले भक्तों को उनसे मिलने की जरूरत नहीं है वह भी एक साधारण इंसान हैं। महिमा तो बागेश्वर धाम और वहां विराजे बालाजी सरकार की है जिनकी शरण में जाने मात्र से कल्याण संभव है। संकट मिटै कटै सब पीरा जो सुमरे हनुमत बलवीरा। हनुमान जी का सुमरन करने से ही सभी प्रकार के संकट और परेशानियों का निराकरण हो जाता है। इस दौरान उन्होंने अपने पूर्व के दरवारों की भांति लोगों के पर्चे बनाये और उनकी समस्याएं बताई। इस दौरान महाराज श्री ने यहां बिना पूंछे ही लोगों के नाम बताये। इतना ही नहीं उनके साथ किसने छल कपट किया है यह तक उजागर कर लोगों को समस्या का निदान बताया। इस दौरान अनेक महिलाएं एवं बहिनें भी दरवार में आई और अपनी समस्या सुनाई। महाराज धीरेन्द्र शास्त्री की बुंदेली और उनका अंदाज देख लोग मंत्र मुुग्ध हो गये। दरवार लगभग तीन बजे तक चला। इस दौरान उमड़ी भीड़ के कारण स्टेडियम का विशाल मैदान भी छोटा जान पड़ रहा था। एक ओर महाराज श्री का दरवार चल रहा था तो वहीं दूसरी ओर दरवार में आये हजारों लोगों के भोजनादि का प्रबंध कथा यजमान पंडित राजेन्द्र तिवारी एवं उनके भक्त मंडल द्वारा किया जा रहा था। दरवार में आये लोगों की समस्याएं सुनने और उनका निराकरण बताकर महाराजश्री ने अनेक लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। इस अवसर पर कुछ पत्रकारों को बुलाकर भी उन्होंने अच्छा खासा विनोद किया। पत्रकारों की पाठशाला में लोगों ने भरपूर आनंद लिया। परीक्षा लेने के हिसाब से आने वाले लोगों की पोल खोलते भी महाराज श्री ने देर नहीं की। लबेरिया रोगियों की भी उन्होंने जहां पोल खोली तो वहीं बीमार कैंसर रोगियों की समस्या और उसका निराकरण बताया। इस अवसर पर पुलिस प्रशासन द्वारा शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये। पंडाल के बाहर तक लोगों की अच्छी खासी भीड़ रही। स्टेडियम के बाहर भी हजारों लोग सडक़ों पर घूमते नजर आये।
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गुरू महिमा का किया वर्णन
राम कथा के दौरान आचार्य पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने गुरू महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गुरू की महिमा सबसे बढ़ी होती है। गुरू बनाने से पहले हमें चाहिये कि उन्हें ठीक तरह से परख लें और गुरू को भी चेला सोच समझ कर बनाना चाहिये। गुरू का सदैव सम्मान करना चाहिये। शास्त्रों में गुरू को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। गुरू की कृपा के बिना ज्ञान संभव नहीं है। गुरू की आज्ञा का सदैव पालन करना चाहिये। गुरू, मां और पिता की आज्ञा पर कभी भी विचार नहीं करना चाहिये। उनके आदेश का पालन बिना विचारे ही कर लेना चाहिये। गुरू सदैव अपने शिष्यों का कल्याण चाहते हैं। आज तीसरे दिन की कथा के दौरान कथा यजमान मीरा-राजेन्द्र तिवारी ने रामायण जी की आरती की और गुरूदेव भगवान का सत्कार किया। संगीतमय कथा के दौरान अनेक रोचक भजन प्रस्तुत किये गये। जिनको सुनकर श्रोता झूम उठे।

