टीकमगढ़। आपकी बच्ची का विवाह अगली साल होगा। यहां से उसकी ससुराल की दूरी 72 किलोमीटर होगी। इतना ही नहीं उसके पति का नाम विनोद होगा। जब गुरूदेव ने एक बच्ची के विवाह के बारे में इस तरह की सारी जानकारी उसके परिजनों को दी, तो सुनकर सभी आश्चर्य चकित और किंमकर्तव्य बिमूढ़ होकर रह गये। इसी प्रकार के एक नहीं, अनेक चमत्कार देख लोग दादा गुरू और सन्यासी बाबा के जयकारे लगाने लगे। यह जानकारी देते हुये राम कथा के मीडिया प्रभारी सौरभ खरे ने बताया कि गुरूदेव के मुख से निकली बानी किसी चमत्कार से कम नहीं होती। असंभव को संभव होता देख श्रद्धालु गुरूदेव के जयकारे लगे। उनकी नजर इस कौने से उस कौने तक पड़ रही थी। चारों ओर से गुरूदेव ने याचकों को बुलाया और उनकी फरियाद सुनी। इस दौरान अनेक लोगों को बेहतर रोजगार का आशीर्वाद दिया, तो कई लोगों की ऊपरी बाधाओं के बारे में बताया। किसी की बहिन की शादी नहीं हो रही है, तो किसी का नहीं चल रहा है रोजगार, परिवार में हो रही है किलकिल, किसी को है लाइज बीमारियां, समस्याएं अनेक निदान एक बाबा बागेश्वर धाम के बाला जी सरकार। पैसी करो, हाजरी लगाओ, विनती करो और समस्याएं करो दूर। यह अद्भुत नजारा देखने वाले हजारों लाखों लोग संतश्री पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के श्रीमुख से समस्याओं के बारे में जहां जान रहे थे,जिनकी अर्जी लग गई, उनके चेहरे खिल उठे। यहां आज दो दिवसीय दरवार के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने हजारों लोगों के कल्याण के लिये भगवान बालाजी सरकार से दुआ की और अपना आशीर्वाद दिया। दरवार में पंडाल लोगों से खचाखच भरा रहा। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु थिरकते रहे। सुबह नौ बजे ही पंडाल खचाखच भर चुका था। हालांकि आज का दरवार फिर थोड़ी बिलंब से शुरू हुआ। दरवार में कोने-कोने से लोग आए हुये थे। दरवार में गुरूदेव ने कहा कि लोगों को हनुमानजी से जुडऩे की जरूरत है, यदि वह सीधे हनुमान जी की उपासना करें और व्यसनों का त्याग करें तो बागेश्वर धाम अपने घर में ही पायेंगे। उन्होंने लोगों को अपने अंदाज में फ टकार भी लगाई। सनातनी लोगों से उन्होंने अपील की है कि सभी खुद को हनुमान जी को सौंप दें, फिर भगवान उनकी जरूर सुनेंगे। बागेश्वर धाम आने वाले भक्तों को उनसे मिलने की जरूरत नहीं हैं, वह भी एक साधारण इंसान हैं। महिमा तो बागेश्वर धाम और वहां विराजे बालाजी सरकार की है, जिनकी शरण में जाने मात्र से कल्याण संभव है। संकट मिटै कटै सब पीरा,जो सुमरे हनुमत बलवीरा। हनुमान जी का सुमरन करने से ही सभी प्रकार के संकट और परेशानियों का निराकरण हो जाता है। कबहुं सो काज कठिन जग माहि…। उन्होंने घर पर पूजा के लिये उपासना की विधि भी बताई और मंत्र भी बताया। इस दौरान उन्होंने अपने पूर्व के दरवारों की भांति लोगों के पर्चे बनाये और उनकी समस्याएं बताई। इस दौरान महाराज श्री ने यहां बिना पूंछे ही लोगों के नाम बताये। इतना ही नहीं उनके साथ किसने छल कपट किया है, यह तक उजागर कर लोगों को समस्या का निदान बताया। इस दौरान अनेक महिलाएं एवं बहिनें भी दरवार में आई और अपनी समस्या सुनाई। महाराज धीरेन्द्र शास्त्री की बुंदेली और उनका अंदाज देख लोग मंत्र मुुग्ध हो गये। दरवार लगभग तीन बजे तक चला। इस दौरान उमड़ी भीड़ के कारण स्टेडियम का विशाल मैदान भी छोटा जान पड़ रहा था। एक ओर महाराज श्री का दरवार चल रहा थाए तो वहीं दूसरी ओर दरवार में आये हजारों लोगों के भोजनादि का प्रबंध कथा यजमान पंडित राजेन्द्र तिवारी एवं उनके भक्त मंडल द्वारा किया जा रहा था। दरवार में आये लोगों की समस्याएं सुनने और उनका निराकरण बताकर महाराजश्री ने अनेक लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी।
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विनम्रता और शालीनता के हुये सभी कायल
हाथ जोड़े बढ़े ही विनम्रता पूर्वक सभी से मिलना और आने वालों का सम्मान करना कोई कथा यजमान राजेन्द्र तिवारी और उनके पुत्र राहुल तिवारी, रिक्की तिवारी से सीखे। उनके व्यवहार और विनम्रता के सभी कायल हो गये हैं। ऐसे में यहां आने वाले हजारों श्रद्धालु राजनैतिक चर्चा करने से भी नहीं चूक रहे हैं। यहां ऐसे लोगों का प्रतिशत भी कम नहीं है, जो कथा यजमान राजेन्द्र तिवारी को एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि की छवि देख रहे हैं। राम कथा का आयोजन श्री तिवारी भले ही गैर राजनैतिक बता रहे हैं, लेकिन उनके व्यवहार और व्यवस्थाओं के कायल हो चुके बागेश्वर धाम के शिष्य मंडल के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों की मंशा स्पष्ट दिखाई देने लगी है। यहां आने वाले श्रद्धालु आने वाले चुनाव में अपना पसंद का उम्मीदवार देख रहे हैं। अब देखना है कि कथा यजमान राजेन्द्र तिवारी अपनी मंशा कब तक उजागर करते हैं। क्या वह आने वाले चुनाव में प्रत्याशी होंगे, यह फिलहाल भविष्य के गर्व में है।
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भगवान ने तौ नाटक करो, जिन कौ व्याऔ हो गऔ, बै तौ सॉसऊ रो रयै…
राम कथा: जो जैसे दिखते हैं, वो बैसे हैं नहीं
सीता हरण के बाद प्रभु राम ने वियोग में जो रोने का नाटक किया। उसके पीछे भी साधु संतों का कल्याण छुपा था। लेकिन आज तौ जिन कौ ब्याऔ हो गऔ बे सांसऊ रो रयै। यह सुनकर ही पंडाल में बैठे लोग हंसने लगे और जो अपने परिवार के साथ आये थे, वो बगलें झांकने लगे। महाराज श्री के विनोदपूर्ण संवाद को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये। आज नवधा भक्ति के चौथे दिन आचार्य श्री पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने राम चरित के सीताहरण सहित अनेक रोचक प्रसंग सुनाकर माहौल को धर्ममय बनाये रखा। इसके साथ ही संगीतमय रामकथा के बीच में भजनों को सुनाकर पंडाल को झूमने के लिये मजबूर कर दिया। नगर के अमर शहीद नारायण दास खरे में स्टेडियम में श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में श्रोताओं ने गुरूदेव भगवान के दर्शनों का लाभ लिया। साथ ही उन्होंने राम कथा का आनंद लिया। गुरूदेव ने कहा कि जो जन्म लेगा, वो निश्चित ही मरेगा और जो मरेगा, वो पुन: जन्म लेगा। इस नियम को कोई रोक नहीं सकता। जीवन में आना जाना हमेशा लगा रहेगा। गहरी नदिया नाव पुरानी, नाव यह जीवन है, जो बहुत पुराना है। हम कभी जानवर बनें, कभी पक्षी बने, कभी किसी रूप में आये, कभी किसी रूप में आये। इसको कैसे जानोगे कि हम पहले भी जन्म ले चुके हैं। महाराज जी ने बताया कि एक छोटे से शिशु को आप छत पर लेकर जाएं और नीचे की ओर झांकें, तो एक छोटा सा बच्चा भी आपको जोर से पकड़ लेगा। इससे यह सिद्ध होता है कि वह जानता है कि यदि जोर से नहीं पकड़ेगा, तो गिर सकता है। यह बालक पहले भी शरीर त्याग चुका है, इसके अंदन डर छुपा है कि कहीं हम गिर न जायें। जब एक छोटा सा बच्चा यह जान लेता है, तो निश्चित है कि वह इस भव सागर में पहले भी आ चुका है। यह जीवन रूपी नाव पुरानी हो गई है। संत में नई नई भक्ति नौ दिन, खींचा तानी दस दिन। जब हम नई नई भक्ति करते हैं, तो जोर जोर से हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, पूजा-पाठ करेंगे और फिर जय जय सीताराम। हनुमान जी को रख दिया एक कमरे में। भैया हरौ भक्ति का दिखावा नहीं करना चाहिये। हरि भक्ति के बिना कल्याण नहीं होता। प्रभु नाम का सुमरन करने से ही जीवन का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी बानर दिखते हैं, परन्तु वह बानर नहीं हैं। इसी प्रकार काकभुसंड जी कौए के रूप में नजर आते हैं, लेकिन वह कौआ नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने सीता हरण का प्रसंग बढ़े ही रोचक ढंग से सुनाते हुये श्रोताओं को खूब आनंद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जब भगवन चित्रकूट में रहे, तब तक सभी साधु संत उनसे मिलने आए, लेकिन जब वह बाद में मिलने नहीं आए, तो प्रभु ने अपने भाई लक्ष्मण से कहा कि भैया पता तो करो कि साधु संत अब क्यों नहीं आ रहे हैं। जब लक्ष्मण जी ने देखा तो सभी साधु संत पत्थर जमाकर उनको आकृति देने में लगे थे। कोई छोटी तो कोई मोटी मूर्ति को बनाने में लगा था। यह बात भगवन को पता चली, तो उन्होंने कारण जानना चाहा। सभी ने कहा कि भगवन सुना है कि जिस पत्थर को आप स्पर्श कर लेता हैं,वह नारी बन जाता है। तो हम सभी चाहते हैं कि आप इन पत्थरों पर से निकल जाएं, जिससे अपनी भी रोटी पानी की व्यवस्था हो जाये। एक-एक स्त्री आश्रम में होगी, तो हम सभी रोटी पानी की चिंता किये बिना भजन कर सकेंगे। यह सुनकर भगवान ने सीता मैया से कहा कि मैं पहले कहता था कि आप वन में साथ न चलें, लेकिन आप नहीं मानीं और अब देखा यह क्या हो रहा है। सभी चाहते हैं कि वह ग्रहस्थ जीवन में रहें। उन्होंने फिर यह लीला रची और सीता का हरण किया गया। अब सीताजी का हरण होने के बाद जब साधु संत नजर आते, तो वह फूट फूटकर रोने लगते। कहते हे खग मृग हे मधुश्रेनी, तुम देखी सीता मृग नयनी..। यह नजारा देखा साधु संतो ने सोचा जब पत्नी के वियोग में प्रभु का यह हाल है, तो उनका क्या होगा और उन्होंने पत्थर की बटईयां फेंकना शुरू कर दिया। भगवान की लीला का आनंद श्रोताओं ने लिया। आचार्य श्री द्वारा सुनाये गये भजन लगी रे मोय राम नाम धुन लागी को सुनकर श्रोता पंडाल में झूमते नजर आये। राम कथा के आरंभ में कथा यजमान श्रीमती मीरा-राजेन्द्र तिवारी ने रामायण जी की एवं महाराज श्री की आरती की। पूजन के साथ ही राम कथा आरंभ हुई। नवधा भक्ति के चौथे प्रसंग के साथ ही आरती एवं प्रसाद वितरण किया। श्रीराम जय राम राजा राम हरि संकीर्तन किया गया। इस अवसर पर पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा। इस अवसर पर अयोध्या, बृंदावन सहित अनेक तीर्थ स्थानों से पधारे साधु संत एवं श्रोता मौजूद रहे। राम कथा के पश्चात विशाल भंडारा हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीण पुरूष और महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर कथा यजमान मीरा-राजेन्द्र तिवारी, रिक्की तिवारी, प्रदीप खरे, राकेश रिछारिया, राकेश, रामू शर्मा, मधुकर उपाध्याय, मिनी खरे, पूनम जायसवाल, प्रकाश अग्रवाल, सौरभ खरे, महेन्द्र, बृजनंदन महाराज, गोलू अग्रिहोत्री, राजू महाराज, राजेन्द्र बिदुआ, जशराज महाराज, जयराम महाराज, श्रीराम यादव, भरत खरे, सेजल खरे, तनिष्का बुंदेला, छाया रैकवार, एकता सिंह बुंदेला, शीतल पुष्पकार, प्रज्ञा खरे, शैली खरे, भावना सिरवैया, अंजली अग्रवाल, प्रीति विश्वकर्मा, पूजा रैकवार, पूजा प्रजापति, शिवानी, मिनी तिवारी सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे। पंडाल में सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था में नगर निरीक्षक मनीष कुमार सहित पुलिस बल मौजूद रहा।
श्री काली समिति पुरानी इटारसी के सदस्य शुभम चौरे का श्री राम कथा के आयोजन टीकमगढ़ में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री के दिव्य दरबार में अर्जी लगी । यह अर्जी लाखों भक्तों के बीच लगी जिसमें उनका नाम पुकार कर उनकी समस्याओं को पहले से ही दिव्य रूप से बताया एवं निराकरण का पर्चा महराज ने उन्हें दिया । शुभम चौरे ने अपने भाई सुधीर चौरे की नोकरी एवं परिवार की खुशहाली के लिए भांजे मयूर चौधरी की पढ़ाई के लिए शास्त्री जी से आशीर्वाद मांगा । इस दौरान डॉ प्रताप सिंह वर्मा को महाराज ने सिंदूरी रंग शर्ट एवं दो मुखी रुद्राक्ष पहने व्यक्ति की पुकार लगाकर आशीर्वाद दिया । इटारसी के लोगों को इतनी बड़ी भीड़ मे बुलाकर पं धीरेन्द्र शास्त्री जी ने मान बढ़ाया हैं इस हेतु बागेश्वर बालाजी सरकार के लिए हम कृतज्ञ हैं ।
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