टीकमगढ़। गुरू पर भरोसा नहीं करते। कुछ दिन ही यदि काम नहीं बनता, तो लोग कुछ ही दिन लोग गुरू को बदल देते हैं। यदि भगवान जल्दी मनोकामना पूरी नहीं करते तो लोग भगवान बदल देते हैं। यहां तक की कई लोग तो पत्नी तक बदल देते हैं। वो तो मां-बाप बदले नहीं जाते, नहीं तो वो भी बदल दिये होते। भगवान की परीक्षा लेने से नहीं, उनकी प्रतिक्षा करने से ही मनोकामना पूरी होती है। आजकल जिन लोगों में ज्ञान नहीं है, वह अपने आप को अज्ञानी मानने को तैयार नहीं हैं। बैलगाड़ी के नीचे चलने वाला कुत्ता यह जानता है कि बैलगाड़ी वह चला रहा है। इसी तरह हम सोच लेते हैं कि यह काम मैने किया है। जबकि करने वाला भगवान होता है। हमें भगवान पर भरोसा करना चाहिये। माता सबरी को भगवान में भक्ति के बारे में विस्तार से बताया। नवधा भक्ति क्या है। यह बताते हुये आज आचार्य श्री पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि गुरू को इंसान समझने की भूल नहीं करना चाहिये। वह साक्षात ईश्वर होते हैं। स्थानीय नारायण दास खरे स्टेडियम में चल रही श्रीराम चरित्र चर्चा के पांचवें दिन आचार्य पंडित धीरेन्द्र शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार ने नवधा भक्ति के पांचवें रूप मंत्र जाप के बारे में बताया। यह जानकारी देते हुये मीडिया प्रभारी सौरभ खरे ने बताया कि संसय मध्य की स्थिति में होता है। यदि हम अज्ञानी हों, तो भी भगवान मिल जाते हैं, या फिर ज्ञानी हों तो भगवान मिल जाते हैं। यदि हम मध्य की स्थिति में हों, तो भगवान कभी नहीं मिल सकते। इस दौरान उन्होंनेे गरूण जी का प्रसंग सुनाते हुये कहा कि संसय होना ठीक नहीं है। उन्हें उस समय संसय हो गया, जब उन्होंने नाग फांस से प्रभु की रक्षा की। उन्हें लगा कि यह भगवान तो हो नहीं सकते, जब उन्हें बचाने के लिये मुझे आना पड़ा। और वह यह संसय लेकर ब्रह्मा, महेश आदि के पास गये। उनके संसय को दूर करते हुये शिव जी ने कहा कि आप मुझे मध्य में मिले हैं। या तो शुरू में मिल जाते, या अंत में मिलते, तो आपकी मदद की जा सकती थी। अब मध्य में मिलने वाले की जिज्ञासा को दूर कर पाना संभव नहीं है। इसी प्रकार उन्होंने मंत्र जाप के महत्व को बताते हुये कहा कि मंत्र जाप का फल तब ही मिलता है, जब आपको विश्वास होता है। संसय नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान की आरती के समय यह भजन गाया जाता है, जो इस तरह से है। जैसे ही उन्होंने भजन अवध सैया मोरी छोड़ो न बईयां, छोड़ौ न बईयां, मौरी छोड़ी बईयां.तुम जानत सब अवगुन मौरे, तुमसें न कछु छुपौ नईयां…..सुनकर श्रोता झूम उठे। उन्होंने कहा कि गुरू की बात को ही मंत्र मानकर जो हम मंत्र मानकर जाप करने लगते हैं, तो हमारा कल्याण होने लगता है। उन्होंने बताया कि रघुनाथ कहते हैं कि गुरू के वचन को मंत्र मानकर जो बैठ जाता है, उसके यहां भगवान को आना ही पड़ता है। भगवान की प्रतिक्षा करनी चाहिये, जबकि आज परीक्षा लेने वालों की संख्या ज्यादा हो चली है। उन्होंने बताया कि सबरी ने भगवान की 10 हजार साल प्रतिक्षा की। अंत में उन्हें भगवान के दर्शन हुये। गुरूदेव ने कहा कि तुम्हें तो चमत्कार चाहिये, लेकिन सन्यासी बाबा के हो जाओ, हनुमान जी हो जाओ। कलियुग के राजा से जुड़ो। जो सुमरे हनुमत बलवीरा…। जो लोग कहते थे कि कुछ भी नहीं है, आज सबके मुंह पर ताले पड़ गये।
गुरूदेव ने सूरदास की भक्ति और भजन का रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान जैसे वस्त्र पहनते थे, सूरदास अपने पद में उनका वर्णन कर दिया करते थे। एक बार उनकी लोगों ने परीक्षा ली और भगवान को वस्त्र ही नहीं पहनाये। जब पुजारी जी ने कहा कि सूरदास जी आज देखौ भगवान का कितना सुंंदर श्रृंगार किया है। आज पद सुनाईये। जब उन्होंनों ध्यान किया तो देखा कि आज तो भगवान के तन पर वस्त्र ही नहीं है, तो उन्होंने अपना मुंह ढक लिया। कहा कि यह क्या आज तो भगवान बिल्कुल…। और उन्होंने इसका वर्णन अपने पद में कर दिया। उनकी भक्ति के बारे में उन्हें कलियुग में पांचवी भक्ति का सबसे सुंदर उदाहरण बताया। संगीतमय राम कथा के बारे में उन्होंने अनेक रोचक प्रसंग सुनाते हुये भज मन राम चरण सुखदायी भजन सुनाकर श्रोताओं को झूमने को मजबूर कर दिया। पंडाल में भक्तों का सैलाब उमड़ा। पैर रखने के लिये जगह नजर नहीं आई। कथा यजमान श्रीमती मीरा-राजेन्द्र तिवारी ने आरती कर राम कथा के पांचवें दिन का शुभारंभ किया। आरती के पश्चात गुरूदेव में कथा में पधारे अनेक लोगों को आशीर्वाद दिया।
बजन नहीं, भजन बढ़ाओ
गुरूदेव के विनोदपूर्ण संवाद चंगीलाल और मंगीलाल कथा के बीच में आज फिर नजर आये। इतना ही उन्होंने कहा कि बजन नहीं भजन बढ़ाओ। आजकल लोग बजन तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन भजन घटा रहे हैं। जबकि भजन बढ़ाना चाहिये और बजन घटाना चाहिये। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम ही मंत्र है। भगवान शिवजी ने भी श्रीराम नाम का जाप किया। समुद्र पर जब पुल बनाया गया, तो राम नाम की शक्ति को देखा। जो राम को जपता, वह काम में नहीं पड़ता और जो काम में पड़ जाता है, वह राम को नहीं पाता है। बैठो संतो के संग, रंगो मोहन के रंग भजन सुनकर पंडाल में बैठी महिलायें नृत्य करतीं नजर आई।
घर पर लगा दर्शनार्थियों का मेला-
सुबह और देर रात तक कथा यजमान राजेन्द्र तिवारी के निज निवास पर रोगियों एवं परेशान लोगों का मेला लगा रहता है। गुरूदेव पंडित धीरेन्द्र शास्त्री जी ने परेशानियों को सुना और उन्हें उपाय बताये। इस दौरान पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे, कलेक्टर अखिलेश श्रीवास्तव, थाना प्रभारी संजय जायसवाल, नगर निरीक्षक मनीष कुमार, एसआई रघुराज सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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