टीकमगढ़
ऑन लाईन खरीदे गए एक प्रिंटर में गारंटी समयावधी के दौरान खराबी आने के कारण उपभोक्ता ने उसे विक्रेता के पास भेजा लेिकन विक्रेता द्वारा सुधार कार्य के लिए राशि की मांग की गई और बिना रािश लिए कार्य करने से मना कर दिया। जबकि उक्त प्रिंटर गारंटी अवधि में था। इसके बादक्रेता ने उपभोक्ता आयोग की शरण में गया।
उपभोक्ता आयोग के सदस्य डॉ प्रीति सिंह परमार ने बताया कि परिवादी आशीष जैन पुत्र प्रशांत कुमार जैन 33 वर्ष निवासी मेन बाजार पृथ्वीपुर जिला निवाड़ी ने प्रबंधक एवं संचालक अपेरियो रिटेल प्राइवेट लिमिटेड रैना आई सेस इंडस्ट्रियल आईएस इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी कल्याण स्पेस रोड बसेरे ग्राम अमाने पोस्ट भिवंडी तालुका थाने एवं प्रबंधक एवं संचालक एफोर्स एचपी 976/ कंचन बिल्डिंग ऑपोजिट मुन्ना लाल महामाया टावर झांसी के खिलाफ यह परिवाद दायर कराया कि अनावेदक गणों द्वारा प्रिंटर को वारंटी अवधि में नहीं सुधार कर एवं सुधार के लिए 12 हजार रुपए की राशि मांग की गई। सेवा में कमी के फल स्वरुप धारा 35 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत क्षतिपूर्ति के लिए उनके विरुद्ध प्रस्तुत किया है। परिवादी के मुख्य तथ्य है कि परिवादी ने अमेजॉन से ऑनलाइन बुकिंग कर एक एचपी प्रिंटर 14 मई 2019 को बुक किया था जबकि डिलीवरी देते समय परिवादी से उसकी राशि 19 हजार 995 रुपए प्राप्त की गई थी। उक्त प्रिंटर में 2 वर्ष की गारंटी दी गई थी लेकिन प्रिंटर क्राय करने के दो माह बाद ही काम करना बंद कर दिया गया था जिसकी शिकायत की गई थी अनावेदक क्रमांक 2 को सुधार के लिए दिया गया था लेकिन अनावेदक क्रमांक दो द्वारा 1 सप्ताह बाद फोन लगा कर परिवादी को बताया गया कि उत्तर प्रिंटर सुधारने में 12 हजार रुपए का खर्च आएगा। परिवादी द्वारा, प्रिंटर गारंटी में होना बताया लेकिन अनावेदक द्वारा बगैर राशि लिए प्रिंटर सुधारने से इनकार कर दिया है। परिवादी द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड नोटिस भी भेजा गया लेकिन अनावेदक द्वारा उसका कोई जवाब नहीं दिया गया। अनावेदक गण का उक्त कृत्य सेवा में कमी की श्रेणी में आता है अनावेदक, सूचना के उपरांत भी प्रकरण में भी अनुपस्थित रहे।
जिससे उनके विरुद्ध प्रकरण में एक पक्षी कार्रवाई की गई आयोग ने यह फैसला दिया। जब प्रिंटर ने दो माह बाद ही काम करना बंद कर दिया था परिवादी की ओर से दिए गए शपथ पत्र के अतिरिक्त अन आवेदक क्रमांक 2 की सर्विस रिपोर्ट क्रय करने की रसीद नोटिस आदि दस्तावेज दिए थे। सर्विस रिपोर्ट के अवलोकन से स्पष्ट है कि इसमें शिकायत यह लेख की गई है कि प्रिंटर में पावर ऑन नहीं हो रहा है प्रिंटर में कोई टूट-फूट पाई गई हो ऐसा कोई उल्लेख सर्विस रिकॉर्ड में नहीं है निश्चित रूप से प्रिंटर 14 मई 2019 के इनवाइस से खरीदा गया है और 6 नवम्बर 2019 को सर्विस सेंटर में ले जाया गया। वारंटी अवधि में प्रिंटर सुधारने के लिए दिया गया । उसे नि:शुल्क सुधार कर देने की जवाबदारी रहती है। जिससे आयोग के अध्यक्ष ऋषभ कुमार सिंह एवं सदस्य डॉ प्रीति सिंह परमार ने यह फैसला दिया की, विपक्षी पक्ष द्वारा परिवादी को प्रिंटर नि:शुल्क सुधार कर एक माह में दिया जाए यदि प्रिंटर में सुधार किया जाना संभव नहीं तो उसे बदलकर उसी मॉडल का या उसी मूल्य का प्रिंटर परिवादी को दिया जाए तथा सेवा में कमी के लिए 15 हजार शारीरिक व मानसिक त्रास 5 हजार एवं वाद 3 हजार पृथक भुगतान किए जाएं । प्रेस को यह तमाम जानकारी उपभोक्ता फोरम की सदस्य डॉ प्रीति सिंह परमार ने व्हाट्सएप के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है।
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