टीकमगढ़। शासन और जिला प्रशासन चाहे जितनी योजनाएं दिशा निर्देश और नियम-कानून बना ले और उनके सही क्रियान्वयन के लिए कितना ही जोर लगा ले लेकिन मैदानी स्तर पर संबंधित अधिकारी कर्मचारी इन निर्देशों को खूंटी पर टांगे रहते हैं। लापरवाही का एक ऐसा ही अजीबोगरीब और बेहद गंभीर मामला मंगलवार 29 जुलाई 2026 को जिला प्रशासन की जनसुनवाई में देखने को मिला जिसने कलेक्ट्रेट परिसर में सनसनी फैला दी।यहाँ खरगापुर तहसील क्षेत्र के दो पीड़ित किसान अपने गले में रस्सी का फंदा लगाकर अपनी-अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचे। जब मीडियाकर्मियों ने इन किसानों से बातचीत की, तो उन्होंने अपनी पीड़ा साझा की। किसानों का कहना था कि वे अपनी भूमि के सीमांकन के लिए लंबे समय से परेशान हैं। कई बार आवेदन देने के बाद भी संबंधित राजस्व अमले द्वारा उनकी भूमि का सीमांकन नहीं किया गया। अधिकारियों के चक्कर काटकर जब किसान पूरी तरह थक और हार गए तब उन्होंने प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में अपने गले में रस्सी का फंदा डालकर जनसुनवाई की डगर चुनी।मातोल गाँव के हैं दोनों किसान दी आत्मघाती चेतावनी प्राप्त जानकारी के अनुसार खरगापुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मातोल निवासी किसान भरोसी अहिरवार एवं रख्खू अहिरवार अपने-अपने हाथों में आवेदन और गले में रस्सी का फंदा डालकर जिला प्रशासन की जनसुनवाई में पहुंचे थे। पीड़ितों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन द्वारा उनकी समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया और भूमि का सीमांकन नहीं हुआ तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में ही फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेंगे।इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्षेत्र में गरीब और मजबूर किसानों के हालात कितने बदतर बने हुए हैं जहाँ समय पर उनके जायज काम भी नहीं किए जा रहे हैं। संबंधित अधिकारी-कर्मचारी शासन और जिला प्रशासन के कड़े नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से कार्यप्रणाली चला रहे हैं जिससे तंग आकर अन्नदाता को ऐसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले के बाद जिला प्रशासन इन लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और किसानों को न्याय कब तक मिलता है।

