नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता / हाइकोर्ट के 25 आपराधिक व सिविल प्रकरणों का 66 दिनों में निराकरण करने के आदेश का अधिवक्तागण विरोध करते चले आ रहे है। आदेश वापसी की मांग को लेकर अधिवक्तागण कई दिनों से कार्य से विरत भी है। लेकिन हाईकोर्ट इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है वहीं अधिवक्ता भी अपनी मांगों पर डटे है। दोनों के डटे रहने से पक्षकार परेशान है और न्यायालीन कार्य प्रभावित हो रहे है। मंगलवार को नर्मदापुरम जिला अधिवक्ता संघ की बैठक हुई। इस दौरान कार्य से विरत रहने की अवधि बढा़ने के प्रस्ताव को सर्व सम्मति से मान्य किया गया। अधिवक्ता संघ सचिव मनोज जराठे ने बताया कि अधिवक्ता गण 23 मार्च से 31 मार्च तक न्यायालीन कार्य से पूर्णतः विरत रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधान जिला व सेंशन न्यायाधीश आलोक अवस्थी को ज्ञापन के माध्यम अवगत कराया है। ज्ञापन के दौरान संघ अध्यक्ष केके थापक, उपाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा, सहसचिव सुरेन्द्र सिंह राजपूत, ग्रंथपाल श्रीप्रकाश दुबे, कार्यकारणी सदस्य, सीके कुरापा, राजेश चौरे, विजेन्द्र राजपूत, क्षमा चौहान, रीतेश विश्वकर्मा के अलावा अधिवक्ता एसआर सोनी, कल्पेश दुबे, शेखर रूसिया, मनीष शर्मा, मदन शर्मा, मुरली असलम बेग, प्रशांत गोहला, किशन मीना, मुनेन्द्र सिंह, प्रशांत राठौर, दुर्गेश कुमार, तारा मालवीय, नीता चौधरी, दिप्ती राठौर, आशा यादव व अन्य मौजूद रहे।

