भोपाल: प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन मध्य प्रदेश के अशासकीय विद्यालयों की समस्याओं को लेकर अपना आवेदन विभाग प्रमुख प्रमुख, सचिव स्कूल शिक्षा एवं मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन को बार-बार बताया परंतु अब तक कोई समाधान नहीं हुआ यह समस्या शिक्षा संबंधित तीनों विभागों से है नंबर एक राज्य शिक्षा केंद्र मध्य प्रदेश द्वारा निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पढ़ने वाले विद्यार्थियों की फीस प्रति पूर्ती दो- दो ,तीन -तीन वर्ष तक लंबित रहती है ऐसा लगता है कि राज्य शिक्षा केंद्र हम संचालकों को भीक्षा दे रहा है साथ ही पूरे भारतवर्ष में सबसे कम फीस प्रतिपूर्ति मध्य प्रदेश में होती है जिसे हम संचालक साथी कम से कम प्रति छात्र प्रतिवर्ष कौन से ₹10000 की मांग करते हैं मान्यता नवनी करण के नाम पर₹40000 की एफडी और₹12000 मान्यता शुल्क लिया जाता है जबकि मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है इसके साथ बोर्ड पैटर्न परीक्षा के नाम पर निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अंतर्गत पढ़ने वाले विद्यार्थियों से भी परीक्षा फीस ली जाती है शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत किसी विद्यार्थी को फेल नहीं किया जा सकता परंतु प्रत्येक वर्ष हजारों विद्यार्थी फेल होते हैं । सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह सब जो राशि राज्य शिक्षा केंद्र लेता है वह अपना एक खाता खोला है उसी में जमा होती है यह राशि शासन के खाते में यानी ट्रेजरी में जमा नहीं कराई जाती है जिसका प्रदेश का एक-एक संचालक पूर्ण रूप से विरोध करता है और मांग करता है कि यह राशि मान्यता और परीक्षा के नाम पर ली जाने वाली राशि समाप्त की जाए और विद्यालयों को स्थाई मान्यता प्रदान की जाए। दूसरा विभाग माध्यमिक शिक्षा मंडल हैं जिसके द्वारा संबध्दता, परीक्षा फॉर्म एवं नामांकन सहित अन्य सभी शुल्कों में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई है जो 30% या उससे अधिक है इसका सीधा असरअभिभावकों पर पड़ रहा है । साथ ही यदि फॉर्म भरने में कहीं छोटी सी गलती हो जाती है तो कम से कम ₹600 और यदि माध्यम गलत भर दिया गया तो ₹1500 तक वसूली की जाती है जिन बच्चों का परीक्षा फॉर्म किसी वजह से रिजेक्ट हो जाता है उनकी परीक्षा फीस भी माध्यमिक शिक्षा मंडल डकार जाता है ।जबकि यह सुधार संस्था द्वारा स्वयं किया जाता है हम मांग करते हैं की त्रुटि सुधार के नाम पर ली जा रही राशि समाप्ति की जाए तथा बढ़ी हुई थी पूर्ववत की जाए । तीसरा विभाग लोक शिक्षसंचालनालय हैं जिसके द्वारा नई मान्यता के लिए 72000 देना पड़ता है और मान्यता नवीनीकरण 44000 लेकर करता है जब मान्यता एक बार मिल गई तो नवीनीकरण में राशि किस बात के लिए जाती है यह लोक शिक्षण का सबसे बड़ा खेल है साथ ही यदि कोई लेट होता है तो लेट फीस अलग ली जाती है और यहां भी यह राशि मध्य प्रदेश शासन अर्थात ट्रेजरी में नहीं जमा कराई जाती है लोक शिक्षण का अपना व्यक्तिगत खाता है जिसमें यह राशि जाती है और उसका खुलकर दुरुपयोग हो रहा है यहां ध्यान देने वाली बात है की नवीनीकरण शुल्क केवल अशासकीय विद्यालयों से लिया जाता है शासकीय विद्यालयों से₹1 भी नहीं लगता है जहां बोर्ड संबद्धता शुल्क दोनों से लेता है और दोनों के 75% से अधिक प्राप्त करने वाले कक्षा 12वीं के बच्चों को लैपटॉप बाटता है जबकि लोक शिक्षण पैसा तो केवल अशासकीय विद्यालयों से लेता है और स्कूटी शासकीय स्कूल के कक्षा 12वीं के प्रत्येक विद्यालय के टॉपर विद्यार्थी को देता है जबकि यह स्कूटी शासकीय और एहसास की दोनों की कक्षा 12 में विद्यालय टॉपर को देना चाहिए। इसके अलावा असंवेदनशील समस्याएं प्राइवेट स्कूलों को है जिसमें मुख्य रूप से फीस अधिनियम में 25000 से कम फीस वाले विद्यालयों को इससे अलग रखा गया है इन विद्यालय में से शपथ पत्र स्टांप पर लिया जाता है जिसे संस्था के लेटर पैड पर लेना चाहिए। यह लगभग ₹1000 खर्च हो जाता है जो विद्यालय 25000 से कम फीस लेते हैं और उनके कुछ बच्चे वाहन सेआते है सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के कारण पूरे बच्चे वहां में जुड़ जाते हैं और वह विद्यालय 25000 से ऊपर दिखाई देने लगता है कई विद्यालय अभी अधिनियम की जानकारी जमा नहीं कर पाए हैं उन्हें₹10000 लेट फीस से मुक्त किया जाए और मौका दिया जाए ताकि वह भी मुख्य धारा से जुड़ सके। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह ने मांग की है कि गलत ढंग से ली जाने वाली फीस समाप्त किया जाए और जो राशि जमा हुई है वह विद्यालय को वापस की जाए साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन मांग करता है कि यदि 27 जुलाई तक इसका निराकरण संबंधित द्वारा नहीं किया गया तो 31 जुलाई को राज्य शिक्षा केंद्र,लोक शिक्षण संचालनालय एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल का एक साथ घेराव एवं प्रदर्शन किया जाएगा जिसमें मध्य प्रदेश के सभी संचालक सम्मिलित होंगे और साथ ही इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विभाग की होगी।


