नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता /माँ नर्मदा के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर रेवा की कलकल धारा के साथ स्वर साधना की देश के दिग्गज मौलिक स्थापित कवियों ने नर्मदा आव्हान सेवा समिति व्दारा नव सवंत्सर गुड़ीपड़वा के अवसर पर सेठानीघाट पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन वरिष्ठ साहित्कार डाँ.जगदीश व्योम के मुख्यातिथि एंव समाजसेवी डाँ.अतुल सेठा की अध्यक्षता एंव भाजपा नेता पं. पीयूष शर्मा के विशिष्ट अतिथि में सम्पन्न हुआ। डाँ.व्योम ने कहां की कविता का स्तर बदलना चाहिए तभी साहित्य ओर काव्य जिंदा रहेगा। डाँ. सेठा ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कार्यक्रम की सफलता की कामना की। पीयूष शर्मा ने कार्यक्रम संयोजक को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए। देश के बडे मंच संचालक कौशल सक्सेना के संचालन ओर केप्टिन करैया के संयोजन मे देश के प्रसिद्ध गीतकार कुंवर जादेव कोटा, वीर रस के ख्यातिलब्ध कवि चौधरी मदन मोहन समर, देश के प्रसिद्ध ओज के कवि देवेन्द्र परिहार बिलासपुर, मधुर कंठी लोकप्रिय कवयित्री सरीता सरोज नागपुर, हास्य व्यंग्य के देश के प्रसिद्ध कवि मुकेश मनमौजी, हास्य कवि दिनेश याज्ञनिक और हास्य के ख्याति प्राप्त कवि असीम शुक्ला इंदौर , वीर रस के युवा कवि सिध्दार्थ श्रीवास्तव रीवा ने शानदार काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन देर रात तक जारी रहा देश के विभिन्न अंचलों से आये 9 कवियों ने हजारों श्रोताओं को अपनी कविता, गीत, गजल, ओज , हास्य, व्यंग्य की रचनाओं से भाव विभोर कर दिया। सर्वप्रथम सरस्वती पूजन कर कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, अतिथियों एंव कवियों का समिति सदस्यों ने फूल मालाओं से स्वागत किया। स्वागत भाषण कार्यक्रम संयोजक केप्टिन करैया ने ओर संचालन संतोष व्यास ने किया। सरस्वती वंदना नागपुर से आई सरीता सरोज की प्रस्तुति से कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ। कोटा के मशहूर शायर कुंवर जावेद ” वह लोग साहिबे कुरआन हो नहीं सकते, किसी भी धर्म की पहचान हो नही करते। जो उग्रवाद को यारो जिहाद कहते है, वह ओर कुछ है मुसलमान हो नही सकते। पर भारत माता की जयजयकार कर श्रोताओं की खूब तालीयाँ मिल।बिलासपुर के देवेंद्र परिहार ने “मुल्क के वास्ते वफादारी किया करते है, मुल्क के वास्ते हर पल ही जीया करते है। हम -तुम इसलिए महफूज है घर मे,क्योकि सीमा पर जवान प्राण दिया करते है “पर खूब वंदे मातरम के नारे लगे।खूब वाहवाही लूटी छपारा के मुकेश मनमौजी “जिम्मेदारी जब हमें झिझोड़ देती हैं,रिश्ता आँखों का आँसू से जोड़ देती हैं। बड़ी धोखेबाज होती ये भूख भी,गुल्लक बच्चों के फोड़ देती हैं, खूब सराही गई। कवि सम्मेलन का कुशल संचालन कर रहे रायसेन से आये कौशल सक्सेना ने अपनी रचना में कहा की “दिल मे जब तक कशिश नहीं होती प्यार की परवरिश नहीं होती। सह जब दिल को कोल करती हैं लाख चाहो वो मिस नहीं होती” श्रोताओं बहुत सराहा गया। देवनगर के दिनेश याज्ञनिक आयोजन मे ऊंचाई प्रदान करते खूब वाहवाही लूटी। नागपुर की सरीता सरोज की सुमधुर कविताएं प्रस्तुती मे “जहां लिखी थी नफरत हम वो पन्ना मोड़ आए है।जिसमें प्रेम का सारा वो चुन्नर ओढ आए हैं। श्रोताओं का मन मोह लिया।असीम शुक्ला ने श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। रीवा के सिध्दार्थ श्रीवास्तव की रचनाओं “न सल्तनत है मेरी ना कोई हुकूमत मै अपने माँ बाप का फिर भी नबाब हूँ, जिस घर मे दो पीढी जी देश के लिए में उसी खून से पैदा हुआ इंकलाब हूँ”। पर श्रोताओं ने खूब ताली बजाई ओर देर रात तक श्रोताओं को खूब गुदगुदाय एवं लोट पोट करते हुए बांधे रख। इस अवसर सुभाष यादव, शिवनारायण महलवार, झनक यादव, मनोज परसाई, नर्मदा प्रसाद हरियले, रमेश नायडू, शिवा यादव, रामेश्वर यादव, राजेश तिवारी, सोमदत्त पाठक, राहुल शर्मा, विजय करैया, आयूष करैया, कार्तिक कांसकार, विकास आगौन, आदर्श करैया, विनिता मालवीय, राधा करैया, आरती शर्मा सहित हजारों श्रोता उपस्थित थे। संचालन हरिओम दीक्षित ने तथा आभार प्रर्दशन हंस राय ने प्रकट किया ।

