प्रदीप गुप्ता/ नर्मदा पुरम / आज प्रदेश में युवाओं के लिए शिवराज सरकार युवा नीति घोषित करने जा रही। इस अवसर पर कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने एक प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार की विफलताओं को बताया। शिवराज सरकार में 10,298 छात्र और 6,999 बेरोजगारों ने की आत्महत्या। मध्यप्रदेश में 70 लाख युवा उच्च शिक्षा से वंचित, बेरोजगारों को लूट रही शिवराज सरकार, व्यापम ने परीक्षा फीस से वसूले 100 करोड़ रुपए। भाजपा सरकार के समय व्यवसायिक परीक्षा मंडल के घोटाले में पहला बड़ा अपराध पीएमटी फर्जीवाड़ा से संबंधित था। 12 जून 2004 अपराध क्रमांक 342 / 04 इसके बाद 13 से अधिक सरकारी नौकरी भर्ती और प्रवेश परीक्षा में 75 लाख से अधिक प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।
पुलिस कांस्टेबल, खाद्य निरीक्षक, चयन टेस्ट, सूबेदार उपनिरीक्षक व प्लाटून कमांडर, मिल्क फेडरेशन जैसे अनेक भर्ती परीक्षा में घोटाला किया गया। इतना ही नहीं डेंटल और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज का भर्ती घोटाला तो व्यापम से भी बड़ा है इस घोटाले के संदर्भ में तो स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2006 में विधानसभा में जांच कराने की बात स्वीकारी थी मगर हजारों युवाओं के भविष्य को बर्बाद करते हुए इस घोटाले पर आज तक पर्दा ही डाल रखा है। यह घोटाला इतना बड़ा है कि स्वयं सीबीआई ने इस घोटाले को की व्यापकता को देखते हुए सर्वोच्च अदालत में इसकी जांच में अपनी असमर्थता व्यक्त की थी। बीते 10 साल में इन बेरोजगारों से 1046 करोड़ रुपए फीस के रूप में वसूल कर 455 करोड़ों रुपए का शुद्ध मुनाफा भी कमाया। एक समाचार को दिए गए इंटरव्यू में निम्न पद के लिए आवेदक लोकेन्द्र वर्मा ने बताया कि उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी में एम्पल किया है मगर बेरोजगारी की बेबसी ने उन्हें यह परीक्षा देने के लिए मजबूर किया इससे भी शर्मनाक यह है कि इसी समाचार पत्र में व्यवसायिक परीक्षा मंडल ने इस बात की चिंता व्यक्त की कि अगर इसी तरह के आवेदन आते रहे तो कम पढ़े लिखे लोगों को नौकरियां नहीं मिलेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार और बेरोजगारों ने साथ साथ पैर पसारे हैं, छात्रों में बेरोजगारी की निराशा इस हद तक व्याप्त हो गई कि उसने अपने उज्जवल भविष्य का अवसर ना देख कर आत्महत्या को गले लगा लिया यह बेहद दुखद और निराशाजनक है कि भाजपा के बीते 17 सालों के कार्यकाल में 17,326 छात्रों और बेरोजगारों ने आत्महत्या को गले लगा लिया। उच्च शिक्षा पर बोले की उच्च शिक्षा बदहाल भविष्य में हाल। मध्य प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर मात्र 29 कॉलेज है जबकि तमिलनाडु में 40 तेलंगाना में 53 केसला में 50 कर्नाटक में 62 आंध्र प्रदेश में 49 कॉलेज प्रति लाख आबादी पर हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने 15 माह के कार्यक्रम में यह तय किया था कि मध्य प्रदेश के सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में ई – क्लासेस प्रारंभ की जाएगी। प्रारंभिक रूप से 200 कॉलेज में इसकी शुरुआत निर्धारित की गई थी, जिसमें ई कंटेंट तैयार कराए जा रहे थे। लैंग्वेज लैब स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, जिसके लिए 200 कॉलेज चयनित किए गए थे। रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों को स्किल डेवलपमेंट के साथ निर्धारित किया गया था। स्थानीय उद्योगों के साथ सामंजस्य बिठाकर स्किल डेवलपमेंट के साथ निर्धारित किया गया था। स्थानीय उद्योगों के साथ सामंजस्य बिठाकर स्किल्ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही थी। अब जबकि इस साल 2023 के अंत में फिर से विधानसभा चुनाव हैं आगे भी जनता कमलनाथ जी को पूर्ण बहुमत से जितायेगी और फिर प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाएगी। प्रेस वार्ता में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार केलू उपाध्याय, महेंद्र शर्मा, शिवराज चंद्रोल, पार्षद अनोखी लाल राजोरिया, अजय सैनी, भूपेस थापक, नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी, राजेश राठौर, श्रीमती कुसुम तोमर, चंद्र गोपाल मलैया, युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव फेजान उल हक़ एवं अन्य कांग्रेसी उपस्थित रहे।

