इटारसी /प्रदीप गुप्ता / शासकीय कन्या महाविद्यालय में आज प्राणी शास्त्र विभाग द्वारा विश्व क्षयरोग (टीबी) दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. आर. एस. मेहरा ने कहा कि विश्व क्षय रोग दिवस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक आबादी को एकजुट करने का एक अवसर है। यह दिन क्षय रोग की रोकथाम और उपचार में हुई प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने और बीमारी से निपटने के लिए लोगोँ में जागरूकता लाने हेतु प्रेरित करना है। प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. संजय आर्य ने विश्व क्षय रोग दिवस 2023 की थीम बताते हुए कहा कि “हां! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं!” इस दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य क्षयरोग के प्रति लोगोँ में जागरूकता पैदा करना है व कहा कि ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैटयुक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो भी टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है। भारत मे 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. कुमकुम जैन ने बताया की टीबी की बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है, इसे क्षयरोग भी कहा जाता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन लाइलाज नहीं है, समय रहते इस बीमारी का इलाज करवा लिया जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। आई. क्यू. ए. सी. प्रभारी डाॅ. हरप्रीत रंधावा ने बताया कि इस दिन प्रतिवर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के तत्वाधान में पूरे विश्व में टीबी से संबंधित कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जिसका उद्देश्य इस वैश्विक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना और इसे खत्म करना है। 1882 में 24 मार्च के दिन जर्मन फिजिशियन एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कोच ने इस जानलेवा बीमारी के कारक बैक्टीरिया के पहचान करने की पुष्टि की थी, जिसके फलस्वरूप टीबी के निदान और इलाज में बड़ी मदद मिली। साधारण भाषा में टीबी को हम क्षयरोग अथवा तपेदिक के नाम से जानते हैं। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में हर दिन औसतन 4000 लोगों की मौत सिर्फ इस जानलेवा बीमारी के चलते हो जाती है। अमित कुमार ने बताया कि टीबी एक घातक संक्रामक रोग है, जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी आमतौर पर ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है। इस अवसर पर डॉ. कुमकुम जैन, डॉ. हरप्रीत रंधावा, श्रीमती मंजरी अवस्थी, डॉ. संजय आर्य, श्रीमती पूनम साहू, अमित कुमार, डॉ. शिरीष परसाई, श्रीमती शोभा मीना, कु. तरूणा तिवारी एवं 60 छात्राएँ उपस्थित थी।