प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/ सोसायटी फॉर प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्स नर्मदपुरम में जिला इकाई द्वारा राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी 12 सितम्बर 22 के बीच सत्र में पांचवी आठवीं बोर्ड का आयोजन के आदेश का विरोध 13 तारीख को ही मेल द्वारा सूचित किया गया था । इसके 1 सप्ताह बाद ज्ञापन द्वारा इसकी सूचना आगे शीघ्र निर्णय न लेने पर धरना प्रदर्शन आंदोलन की दी गई थी। 10 अक्टूबर 22 को राज्य शिक्षा केंद्र आयुक्त द्वारा वेबीनार के माध्यम से फीस प्रतिपूर्ति एवं पांचवी आठवीं बोर्ड जिज्ञासा समाधान निर्देश प्रदान किए जो संवाद के स्थान पर एक तरफा निर्देश दिए गए। जिसमें अव्यावहारिक पक्ष प्रस्तुत करते हुए शिक्षा के अधिकार कानून में फीस प्रतिपूर्ति के नियमों का सर्वथा उल्लंघन करके 31 मार्च 21 को जो राशि दी जाना थी, जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी सभी राज्यों को आदेश प्रदान किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना एवं कानून के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए 14 अक्टूबर को वनक्लिक के माध्यम से 1 वर्ष की प्रदान की जाने वाली राशि के लिए भी असमर्थता व्यक्त कर दी। जिससे प्रदेश के हजारों विद्यालयों में कार्य करने वाले लाखों शिक्षकों के परिवार में दीपावली से पूर्व भुगतान की स्थिति दिक्कत में आ गई। जिला संयोजक आलोक राजपूत ने बताया संगठन द्वारा पांचवी आठवीं बोर्ड में बच्चों की वास्तविक मनोदशा जो 2 वर्ष पूर्व की कक्षा की थी शिक्षक साथियों द्वारा उन्हें नियमित अध्यापन की व्यवस्था में मुश्किल से लाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में बोर्ड परीक्षा का भय जहां पूर्व से कोई जानकारी या पाठन सामग्री की उपलब्धता बाजार में नहीं है आदेश दिया जाना उनकी परीक्षा फीस भी स्कूलों के द्वारा जमा करने के आदेश दिए जाना जो सर्वथा अव्यवहारिक हैं। इसके लिए विधिवत आदेश के साथ आगामी वर्ष से बोर्ड परीक्षा कराने का संगठन द्वारा मांग की गई है। जिसके लिए आज पीपल चौक पर संपूर्ण ब्लॉक से बड़ी संख्या में पदाधिकारी संचालक गण उपस्थित हुए धरने में प्रदेश अध्यक्ष डॉ आशीष चटर्जी एवं प्रदेश संगठन मंत्री रवि शंकर राजपूत के साथ प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य प्रशांत जैन , राजेश दुबे , आलोक राजपूत तथा अन्य पदाधिकारियों द्वारा शासन के असंवेदनशील दोनों निर्णयों के विरुद्ध एक मत से संपूर्ण प्रदेश में 18 अक्टूबर को विद्यालय बंद रखने की घोषणा की । यदि इसके बाद भी मांगे नहीं मानी गई तो उग्र आंदोलन संपूर्ण प्रदेश में होने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र आयुक्त और शासन जिम्मेदार होगा । संगठन अपनी बात को न्यायालय के माध्यम से भी साथ में प्रस्तुत कर रहा है। परंतु 2 वर्ष की नियमित अध्यापन के विलग रहने के बाद ऐसे संवेदनहीन आदेश के लिए मुख्यमंत्री द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाना अपने भांजे, भांजीयों को शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर करने की तैयारी है। आने वाले वर्ष में पालक संचालक शिक्षक इस अव्यावहारिक निर्णय के लिए अपना विरोध अन्य प्रकार से दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र होंगे। धरने में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ जिला अध्यक्ष राजेश दुबे, कार्यकारी जिलाध्यक्ष आलोक राजपूत, संभागीय अध्यक्ष राधारमण मिश्रा एवम सभी ब्लॉक के अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में संचालक उपस्थित थे।

