टीकमगढ़। सरकारी स्कूलों में 15 से 30 वर्षों से सेवाएं दे रहे प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता का मुद्दा फिर गरमा गया है। लंबे समय से अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों को दोबारा टीईटी में शामिल होने के लिए बाध्य किए जाने के विरोध में मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने मंगलवार को मोर्चा खोल दिया। संगठन ने जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की।
नियुक्ति के समय पूरी कर चुके हैं निर्धारित प्रक्रिया
शिक्षक कांग्रेस का कहना है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले अनेक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति 15 से 30 वर्ष पहले शासन द्वारा निर्धारित नियमों और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी। नियुक्ति के बाद ये शिक्षक लगातार शासकीय स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में वर्षों की सेवा और अनुभव के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों के साथ उचित नहीं है।
दो दशक से अधिक का अनुभव, फिर परीक्षा क्यों?
जिला अध्यक्ष धीरज मिश्रा ने कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षक दो दशक से अधिक समय से सरकारी स्कूलों में अध्यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति निर्धारित नियमों और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी। इतने लंबे समय तक लगातार शिक्षण कार्य करने के बाद उनके अनुभव और योग्यता को नजरअंदाज कर दोबारा परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों में असंतोष और मानसिक दबाव पैदा कर रहा है।
अनुभव को भी मिले महत्व
शिक्षक कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के मामले में पूर्व निर्धारित चयन प्रक्रिया और उनके कार्य अनुभव को भी महत्व दिया जाए। संगठन ने टीईटी की बाध्यता को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में जल्द निर्णय लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि शिक्षकों के बीच बना असमंजस दूर हो सके।
मांग पूरी नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन
शिक्षक कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश शासन को भी भेजी गई है।
ये शिक्षक रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष धीरज मिश्रा के साथ नसीम खान, अमानत उल्ला, हिदायत उल्ला खान, अमर शर्मा, अनुपम दीक्षित, बृजेश मिश्रा, अशोक जैन क्रांतिकारी (बल्देवगढ़), रईस खान, अशोक शर्मा, निखिल शर्मा, सदीक मोहम्मद, श्रीमती संगीता यादव, संतोष यादव, संजीव मिश्रा, बृजेश प्रजापति सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
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