इटारसी- शुक्रवार को ग्राम सांवलखेड़ा के सोसाइटी परिसर में कृषि क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और किसानों को समयबध्द एवं आवश्यकतानुसार वित्तीय सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश की अग्रणी बैंक सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के तत्वाधान में कृषि संगोष्ठी एवं राष्ट्रव्यापी मेगा कृषि ऋण आउचरीच शिविर आयोजित हुआ।
इटारसी- शुक्रवार को ग्राम सांवलखेड़ा के सोसाइटी परिसर में कृषि क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और किसानों को समयबध्द एवं आवश्यकतानुसार वित्तीय सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश की अग्रणी बैंक सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के तत्वाधान में कृषि संगोष्ठी एवं राष्ट्रव्यापी मेगा कृषि ऋण आउचरीच शिविर आयोजित हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद नर्मदापुरम विधायक डा. सीतासरन शर्मा की मौजूदगी में 150 करोड़ से अधिक के ऋण के स्वीकृति पत्र किसानों और महिला समूहों को प्रदान किए गए। डा. शर्मा ने कहा कि विकसित भारत का रास्ता गांव से होकर जाता है। बैंक ऋण देश और प्रदेश के विकास का मुख्य आधार बनते हैं, जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई, कृषि और आवास जैसे क्षेत्रों को गति प्रदान करते हैं। क्षेत्र में कृषि, एमएसएमई के तहत किसानों को ऋण सहायता प्रदान होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। कार्यक्रम का स्वागत भाषण और प्रस्तावना मुंबई केंद्रीय कार्यालय से आए महाप्रबंधक एडी श्रीनिवास ने रखी। उन्होंने कृषि समृध्दि-बैंक सहयोग, हर खेत-हर किसान, आपकी पूंजी-आपका अधिकार को लेकर जानकारी दी। क्षेत्रीय प्रमुख रजत मिश्रा ने किसानों को उनकी कृषि आवश्यकताओं जैसे फसल ऋण, कृषि उपकरण ऋण, डेयरी, मत्स्य पालन, पोल्ट्री एवं फूड प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियों के लिए त्वरित एवं सरल ऋण सुविधा प्रदान करने को लेकर जानकारी दी। इस अवसर पर जिले के प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया गया। वहीं विशिष्ट अतिथि सिवनीमालवा विधायक प्रेमशंकर वर्मा ने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों के हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये पहल किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें सीधे मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जोडक़र आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेगी। जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र चौकसे ने कहा कि पहले किसानों को बैंक के चक्कर काटना पड़ता था, लेकिन अब बैंक गांवों में किसानों के बीच पहुंचकर योजनाओं का लाभ दे रही हैंं, इससे ग्रामीण भारत मजबूत और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहा है। जिला खेती किसानी के दम पर देश में नई पहचान बना रहा है। यह बदलाव सिर्फ भौगोलिक अनुकूलता का नतीजा नहीं है, बल्कि बीते कुछ वर्षों में लागू की गई ठोस नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय अनुशासन का असर है।

पत्रकार-कुणाल पासवान
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