टीकमगढ़। नगर के गांधी चौराहे का आलम सुबह 8- 9 बजे से लेकर करीब 10- 11 बजे तक रोजाना बड़ा ही पेचीदा रहता है जहां सैकड़ों की संख्या में मजदूर मजदूरी की तलाश में यहां आकर खड़े होते हैं और यह मजदूर पूरे चौराहे पर खड़े रहते हैं जहां आवागमन भी बाधित होता है और आशंका भी बनी रहती है कि कभी कोई दुर्घटना यहां ना हो जाए हालांकि पुलिस कोतवाली के बगल में ही यह चौराहा है जहां पुलिस भी इन चीजों पर ध्यान नहीं देती है और ना ही यातायात पुलिस का ध्यान इस ओर कभी जाता है ना ही इन मजदूरों को कभी समझाइस दी जाती है कि सड़क और चौराहे को छोड़कर खड़े रहो उसे कबर नहीं करो मजदूर बेतरतीब ढंग से पूरे चौराहे को कवर किए रहते हैं जहां वाहनों की आवाजाही में भी समस्याएं होती हैं और यह डर भी बना रहता है कि कभी कोई हादसा यहां न हो जाए। घंटाघर की ओर से आने वाली सड़क ढलान में भी पड़ती है और उसी पॉइंट पर यह मजदूर खड़े होते हैं जहां वाहनों की आवाजाही से यहां हादसे का डर बना रहता है इस और यातायात पुलिस और पुलिस को ध्यान देना चाहिए जिससे कि कभी कोई हादसा ना हो सके।… उचित स्थान बैठने के लिए है जरूरी…. हालांकि इन मजदूरों को शासन प्रशासन की ओर से यहां बैठने की कोई उचित व्यवस्था होना चाहिए जिससे कि यह सभी मजदूर एक जगह आराम से खड़े हो सके बैठ सके इस प्रकार की व्यवस्था होना आवश्यक है लेकिन शासन प्रशासन साकेत जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस ओर भी कोई ध्यान नहीं देते हैं जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों से आए यह मजदूर जगह-जगह इस चौराहे सड़क पर बेतरतीब ढंग से खड़े होने के लिए मजबूर हैं और कोई उचित व्यवस्था इनके बैठने और खड़े होने की ना होने से भटकते हैं।….. कैसी शासन की योजनाएं और कैसा क्रियान्वयन….. शासन प्रशासन इन मजदूरों के हितों में इनके कल्याण और विकास को लेकर अनेक जनहितैषी योजनाएं चला रहे हैं लेकिन आज भी इस वर्ग के हालात जस के तस दिखाई देते हैं जहां भारी संख्या में यह मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों से यहां मजदूरी की तलाश में आते हैं और रोजी-रोटी की व्यवस्था में जुट जाते हैं कभी-कभी तो कई मजदूरों को मजदूरी ना मिलने के कारण हताश होकर उल्टे पांव अपने घर वापिस लौटना पड़ता है जबकि यह मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 30 -30, 40- 40 किलोमीटर दूर से आते हैं इससे यह अंदाजा भी लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की कल्याणकारी योजनाओं का क्या असर है।

