प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम / प्रतिभा जन्मजात होती है या यूं कहो कि बचपन में हुए शौक से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखर जाता है, आज हम शहर की रचनाकार श्रीमती रेखा रतनानी की कई रचनाओ में से एक रचना आप तक पहुंचा रहे हैं।
“कविता एहसासों की”——
जो पूछूं एक सवाल , जवाब तुम दोगे।
जो हमसे है प्यार , वो इजहार तुम दोगे।
जो मांगू तुम्हारा साथ,वो हाथों में हाथ तुम दोगे।
जो कहूं रखना है ख्याल,वो अधिकार तुम दोगे।
जो पूछूं एक सवाल जवाब तुम दोगे।
जो हमसे है प्यार,वो इजहार तुम दोगे।
जो सजाऊं आंखों में, वो ख्वाब तुम दोगे।
जो गुनगुनाऊ गीत, वो झंकार तुम दोगे।
जो खिले प्रेम कलियां, वो बाहर तुम दोगे।
जो लगाऊं रंग गालों में, वो गुलाल तुम दोगे।
जो पूछूं एक सवाल, जवाब तुम दोगे।
जो हमसे है प्यार, वो इजहार तुम दोगे।
जो नदी बनू एहसासों की, वो धार तुम दोगे।
जो लिखूं प्रेम किताब, वो जज्बात तुम दोगे।
जो हो जाऊं ,,कलम,, वो दवाद तुम दोगे।
जो जोड़ु पन्ने जीवन के, वो किताब तुम दोगे
जो पूछूं एक सवाल जवाब तुम दोगे।
जो हमसे है प्यार, वो इजहार तुम दोगे।
रचयिता – रेखा रतनानी नर्मदापुरम
एहसास की कलम RR महादेव

