प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम/सत्यनारायण गौर, शैलेंद्र गौर वकील के परिवार में डॉ. शिवम गौर, सचिन गौर ने अपनी स्व. माता श्रीमती संध्या गौर की स्मृति में भागवत कथा का आयोजन किया । जिसमे क्षेत्रवासी कथा वाचक पंडित जी की कथा शैली से सभी बहुत भावुक और प्रभावित है। पंचम दिवस की कथा में भगवान श्री कृष्ण के नामकरण , पूतना सकटासुर, तृनारवर्त वध वृतांत से कथा वाचक पंडित संजय शर्मा ने कथा के माध्यम से श्रोताओं को नामकरण एवम् जन्मदिवस पर बहुत विस्तार से समझाया की आज के परिवेश में हमारे समाज में अपनी मूल संस्कृति को विस्मृत किया जा रहा है पाश्चात संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे हमारी भावी पीढ़ी संस्कार से ग्रसित हो रही है। ये बीमारी हमारी मूल संस्कृति का विनाश कर देगी ऐसे ही पंडित जी ने व्रत उपवास को भी समाज गलत ढंग से प्रचलित है , व्रत का सही अर्थ है संकल्प एवम उपवास का शाब्दिक अर्थ उप माने समीप वास माने निवास अर्थात हमे हमेशा अच्छे भगवत भक्ति के संकल्प लेना चाहिए जिससे अपने आप ही ईश्वर के पास वास करने की स्थिति निर्मित हो।

