प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम /पोस्ट ऑफिस घाट पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास पंडित शुभम दुबे ने कथा श्रवण कराते हुए कहा कि प्रभु किस पर रीझ जाएं किस पर कृपा कर दें यह तो सिर्फ प्रभु ही जानते हैं। कल भगवान श्रीकृष्णका जन्मोत्सव नंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। पंडित शुभम दुबे ने कहा कि कलयुग में ईश्वर नाम से बढ़कर और कुछ नहीं है. ईश्वर का नाम लेने से कष्टों का निवारण होता है. साथ ही हृदयरूपी कमल खिल जाता है। भक्त के भाव को केवल ईश्वर ही समझ सकते है। इसीलिए जीव को अपना दुख संसार के सामन नहीं केवल प्रभु के सामने ही प्रकट करना चाहिए। प्रभु पालनहार है, वे शरण में आए भक्तों के दुख हर लेते है। कभी भी धर्म का मार्ग और भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। जीवन में सदैव निष्काम भाव से भक्ति करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में जब भी बोलो, सदैव सोच समझकर बोलो और प्रेम से बोलो, हित-मित और प्रिय वचन बोलो, ऐसे वचन नहीं बोलो, जिससे किसी का अहित हो। विदुर की कथा श्रवण कराते हुए दुबे जी ने बताया की प्रभु भाव देखते हैं। दुर्योधन के पास छप्पन भोग था लेकिन भगवान ने उस भोग को त्याग दिया और जाकर के विदुर के घर प्रसाद पाया। क्योंकि प्रभु कहते हैं कि ना तो दुर्योधन के पास भाव था और ना मेरे पास भूख थी। क्योंकि भोजन दो ही स्थितियों में होता है या तो खिलाने बालों के पास खूब भाव और प्रेम हो या व्यक्ति को भूख लगी हो भगवान ने कहा ना तो दुर्योधन के पास भाव है और ना हम को भूख लगी है इसलिए भगवान भाव के भूखे हैं। भगवान शिव और सती की कथा श्रवण कराई कपिल उपाख्यान भगवान कपिल अवतार की कथा श्रवण कराई। कल कथा में श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। कथा रोज 1:00 से शाम 5:00 बजे तक 16 जनवरी तक चलेगी।

