प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम/ कागजों में माफियाओं से जगह मुक्त कराने के लिए तो कई खबरें पढ़ी हैं पर हकीकत कुछ और होता है। एंटी माफिया अभियान में एक लाख एकड़ सरकारी जमीन दबंगों से मुक्त कराने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार और उसका सर्वशक्तिमान प्रशासन एक गरीब किसान की जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त नहीं करा पा रहा है। आलम यह है कि किसान पिछले पांच साल से इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ते लड़ते, कार्यालयों के चक्कर लगा- लगाकर इस कदर थक चुका है, कि वह लकवा का शिकार हो गया। अब बिस्तर पर पड़े-पड़े उनकी आंखों से अपनी जमीन का कब्जा वापस लेने का सपना तक ओझल होने लगा है, लेकिन निर्मम प्रशासन उसकी जमीन का कब्जा वापस दिलाने तैयार नहीं है, तो बेदर्द दबंग जमीन से कब्जा छोडऩे को राजी नहीं है। यह पीड़ा सिवनी मालवा से सटे ग्राम बासनिया कीर के बुजुर्ग किसान भरत सिंह कीर की है, जो जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश में पटवारी और तहसीलदार के चक्कर लगा लगाकर अब पैरालिसिस का मरीज बन कर बिस्तर पकड़े हुए है। उसकी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। इसकी शिकायत सिवनीमालवा तहसीलदार, एसडीएम से की।
न्याय मांगने कमिश्नर कोर्ट में भी शरण ली, कमिश्नर और एसडीएम ने उसकी जमीन का कब्जा दिलाने और सीमांकन कराने के लिए निर्देश भी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को दिए लेकिन राजस्व विभाग का लचर सिस्टम अपने वरिष्ठ अधिकारियों और संभागायुक्त कोर्ट के निर्देश का पालन करने में हीला हवाली बरत रहा है। जमीन पर से कब्जा कैसे हुआ यह जांच का विषय है और भरत कीर नामक बुजुर्ग पिछले 5 साल से भटक ही रहा है, लेकिन कब्जा तो दूर अभी तक उसकी जमीन का सीमांकन तक नहीं हो सका है।
*सीएम हेल्प लाइन भी हेल्पलैस*
भरत सिंह कीर ने बताया कि सीएम हेल्प लाइन 181 पर शिकायत करने पर उसकी समस्या सुलझ सकती है, बुजुर्ग ने इस भरोसे के साथ सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत भी की लेकिन बिना समाधान किए शिकायतों को बंद करने में महारत हासिल कर चुके प्रशासन ने जमीन का कब्जा अभी तक नहीं दिलाया गया। अब भरत सिंह कीर की आर्थिक और मानसिक स्थिति अत्यधिक खराब है।
भरत सिंह कीर की 5.30 एकड़ जमीन पर जगदीश गौंड़ और उसके साथियों ने कब्जा कर रखा है। सभी रसूखदार हैं अफसरों से मिल सकते हैं, उनकी मुठ्ठी गर्म करते रहते हैं, इसलिए बुजुर्ग को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। वास्तविक जमीन कीर परिवार की है। वही खसरा खतौनी रिकॉर्ड सरकारी दफ्तरों में दस्तावेजों में भरत सिंह कीर का नाम दर्ज है और सरकारी तीनों आदेश में उसके पक्ष में फैसला भी दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी कार्यवाही नहीं हो रही है।
*इनका कहना*
इस मामले में मंगलवार को भी जनसुनवाई में शिकायत की गई है, इसके पूर्व तीन बार मुख्यमंत्री हेल्प लाईन में भी शिकायत की जा चुकी है मैं पैरालिसिस का मरीज हूं, अभी तक मुझे न्याय नहीं मिल सका।
भरत सिंह कीर, पीड़ित

