टीकमगढ़। शहर की नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महोत्सव बड़े ही धूमधाम एवं भक्ति भाव के साथ शहर के ढोगा प्रांगण में चल रहा है ।बुंदेलखंड सहित देशभर से प्रतिदिन 25 से 30,000 हजारों श्रद्धालु महा महोत्सव में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। यह महोत्सव निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज एवं छुल्लक 105 श्री गंभीर सागर जी महाराज के सानिध्य में चल रहा है । महोत्सव के प्रतिष्ठा चार्य ब्रह्मचारी प्रदीप भैया जी अशोकनगर है।
प्रतिदिन शाम को 6:00 बजे से जिज्ञासा समाधान का ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसका संचालन अमित भैया जी जबलपुर के द्वारा किया जा रहा है ।
मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि बुधवार को प्रातः 6:00 मंगलाष्टक श्रीजी का अभिषेक शांति धारा संपन्न हुई 8:00 नित्यम पूजन एवं तप कल्याणक की पूजा संपन्न हुई।
8:30 निर्यातक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज मंच परविराजमान हुए
उनके पाद प्रक्षालन चित्र अनावरण एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्रीमती किरण जैन सुभाष धमासिया संजय धमासिया को प्राप्त हुआ।
मुनि श्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि आज हम केवल ज्ञान कल्याणक मनाने जा रहे हैं आज पंचकल्याणक महोत्सव का चौथा दिन है मुनि श्री ने कहा कि जब भी हम भगवान के दरबार में जाते हैं कुछ ना कुछ लेकर के जाना चाहिए अगर हम खाली हाथ जाएंगे तो खाली हाथ वापस आना पड़ेगा अगर भगवान के दरबार में हम कुछ भेंट लेकर जाएंगे तो बापिस कुछ ना कुछ हमें जरूर प्राप्त होगा ।मुनि श्री ने कहा कि जब सुदामा द्वारकाधीश के दरबार में जाते हैं वह अपने साथ कपड़े की पोटली में मुट्ठी भर चावल लेकर जाते हैं इससे ज्यादा उनके पास कुछ भी ले जाने को नहीं था जब सुदामा श्री कृष्ण के पास पहुंचते हैं अपनी भेंट श्रीकृष्ण को देते हुए कहते हैं ऐ मित्र तुम्हारी भाभी ने तुम्हारे लिए कुछ भेजा है जब श्री कृष्ण उस कपड़े की पोटली को खोल कर देखते हैं। बड़े ही प्रसन्न मन से सुदामा द्वारा लाए हुए चावलों को ऐसे ही खा जाते हैं। जैसे बहुत दिनों से कुछ खाया ना हो। जब भी तुम लोग किसी बड़े के यहां जाओ कुछ ना कुछ भेंट लेकर जरूर जाना।
सुदामा ने किसान के खेत के बीज रूपी चावल श्रीकृष्ण को भेंट किए थे श्री कृष्ण ने उस बीज के बदले पूरी फसल सुदामा को भेंट की। श्री कृष्ण ने पहले उन चावल को खाया फिर उनको फसल के रूप में वापस लौटा दिया श्रीकृष्ण ने ऐसा इसलिए किया कि सुदामा को कुछ ऐसा अनुभव ना हो इन्होंने हमें कुछ वैसे ही दे दिया। मुनिराज आदि कुमार को आहार दान देने का सौभाग्य राजा सोम एवं राजा श्रेयांश को प्राप्त हुआ।
मुनि श्री दोपहर 3:00 बजे समवशरण में विराजमान हुए उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार केवल विशुद्धतम ज्ञान को कहते हैं। इस ज्ञान के चार प्रतिबंधक कर्म होते हैं- मोहनीय, ज्ञानावरण, दर्शनवरण तथा अंतराय। इन चारों कर्मों का क्षय होने से केवलज्ञान का उदय होता हैं। इन कर्मों में सर्वप्रथम मोहकर का, तदनन्तर इतर तीनों कर्मों का एक साथ ही क्षय होता है। ऐसी कोई भी वस्तु नहीं, ऐसा कोई पर्याय नहीं जिसे केवलज्ञान से संपन्न व्यक्ति नहीं जानता। फलत: आत्मा की ज्ञानशक्ति का पूर्णतम विकास या आविर्भाव केवलज्ञान में लक्षित होता है।
इसी के साथ केवल ज्ञान कल्याणक संपन्न हुआ।
कमेटी के लुइस चौधरी ,विमल जैन, एवं बाबा नायक ने बताया कि गुरुवार को मोक्ष कल्याण मनाया जाऐगा।
प्रातः 5:30 बजे मंगलाष्टक शांति मंत्र श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा पूजन कैलाश पर्वत की प्रारंभिक क्रिया संपन्न होगी
7:30 पर 9:00 प्रभात की नई किरण के साथ भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत से निर्वाण की प्राप्ति तत्पश्चात अग्निकुमार देवों का आगमन
9:00 बजे कल्याणक पूजन एवं विश्व शांति महायज्ञ मुनि श्री के प्रवचन होगे।
दोपहर 1:00 बजे से विशाल पंच गजरथ महोत्सव भव्य शोभायात्रा 3:00 बजे मुनि श्री के मंगल प्रवचन होंगे।

