नर्मदापुरम/ रेखा रतनानी/
विश्व गौरैया दिवस पर विशेष,,
मटक-मटक करती ता-थैया
आती खिड़की पर गोरिया…..
रोज सवेरे आ जाती है।
झूम-झूम दाना खाती है।
पेट स्वयं का भर जाता जब।
लिए चोंच में उड़ जाती है।
नन्हीं होकर भी हम सबको।
उधम करना सिखलाती है।
मिले सहपा अभिराम नयन को।
ऐसा सुख न मिले रुपैया….
मटक-मटक करती ता-थैया
आती खिड़की पर गौरैया..!!!
भारत एक ऐसा देश है जहां पर पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियां पाई जाती है। पक्षी पर्यावरण के अभिन्न अंग होते हैं , तभी तो प्रकृति का चित्र हम जब भी बनाते हैं तो हम पेड़- पौधे नदी- झरनों के साथ पक्षियों को भी दर्शाते हैं।
खुले आसमान में अपने खूबसूरत पंखों को फैला जब यह पक्षी उड़ते हैं वह प्रकृति का दृश्य और भी मनोहर हो जाता है खूबसूरत और आकर्षक दिखाई देता है। पक्षियों के निवास से वन प्रांतों की शोभा और बढ़ जाती है।
ईश्वर ने न केवल मनुष्यों को विशेष गुणों से नवाजा है, बल्कि पक्षियों को भी विशेष गुणों से सुशोभित किया है।
जैसे कोयल को मधुर आवाज स्वर का वरदान, मोर जिसे खूबसूरती का वरदान व बारिश में नृत्य का भी गुण समावेश है और भी कई ऐसे पक्षी है जो अपने अनेकों गुणों से पहचाने व जाने जाते हैं।
जिसमें सभी पक्षियों में गौरैया का विशेष महत्व है।
गौरैया दिखने में छोटी व खूबसूरत आकर्षक होती है, गौरैया पूरे विश्व में लगभग हर जगह पाई जाती है। गौरैया की औसत आयु 5 से 7 वर्ष तक होती है। गौरैया को अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
जैसे चिड़िया ,चढ़ी ,चिमनी ,चटिया चिरई, आदि.
पक्षियों की चहचहाहट उनका कुहू कुहू मन को कितना लुभाती है जिस घर की मुंडेर में पक्षी आ बैठते हैं उस घर की शोभा और बढ़ जाती है।
गौरैया को अक्सर हमने अपने आसपास घरों और पेड़ वृक्षों पर देखा है।
लेकिन लेकिन आज के समय में पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई और कीटनाशक पदार्थों के छिड़काव के कारण यह विलुप्त होती जा रही है, कई ऐसी टेक्नोलॉजी जिन की लेजर लाइट हानिकारक किरणे पक्षियों के लिए हानिकारक व घातक हो रही है।
ध्वनि प्रदूषण जल प्रदूषण वायु प्रदूषण धरा प्रदूषण अनेक तरह के प्रदूषण, जिसमें मनुष्य पूरी तरह से भागीदार है।
इनका बचाओ पर्यावरण के प्रकृति के चक्रीय करण में अति आवश्यक है।
अब घर की मुंडेरो पर , दिखती ही नहीं चिड़िया।
पंखों में खुशी भरकर, उड़ती ही नहीं चिड़िया।
स्वार्थ की कुल्हाड़ी ने, जंगल को मिटा डाला।
विश्वास के दानों को,चुगती ही नहीं चिड़िया।
आमजन से विनम्र निवेदन……
हृदय भाव से विनम्र हाथ जोड़ विनती करती हूं पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक मनुष्य अपना दायित्व व कर्तव्य निभाएं, प्रकृति है तो हम हैं।
,,मैं,, नर्मदापुरम रेखा रतनानी एहसास की कलम RR महादेव

