नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता/ इटारसी के तंज़ीम इस्लाहुल मुस्लिमीन संगठन ने नर्मदापुरम जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया जिसमें उल्लेख किया कि जिले में कुछ तब्लीगी जमात के मानने वाले लोग हम अहले सुन्नत सूफी सुन्नी विचारधारा के लोगो के धार्मिक मामलों में निस्तर हस्तक्षेप कर रहे हैं। पूर्व में घटित घटना सिवनी मालवा बनापुरा की है, जिसमें सुन्नी सूफी विचारधारा को मानने वाले लोग अपने घरो में रमजान की विशेष नमाज तराबीठ करवा रहे है, जिसका विशेष तब्लीगी जमात के लोगों ने किया एवं झूठा प्रोपगंडा फैलाया कि अहले सुन्नत सूफी विचारधारा के मानने वाले लोग सम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ रहे हैं, जो कि सरासर झूट और गलत आरोप है, इस पत्र के माध्यम से हम आपको अगवत करवाना चाहते हैं कि अहलेत पत जमात सूफी विचारधारा को मानने वाले लोग 850 वर्ष पूर्व सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के मानने वाले लोगो का समुदाय है, जो की सदियों से अमन भाईचारे का पैगाम देता आ रहा है, तब्लीगी जमात का गठन 1926 में हुआ इनके द्वारा कई गांवों एवं शहरों की मस्जिदों और मदरसों पर जिनका कि निर्माण हमारे हमारे बुजुगों के द्वारा करवाया गया था उन पर इनके द्वारा कब्जा कर लिया गया है। जिसके चलते लोग अपने घरो में नमाज अदा करने पर मजबूर है एवं हमारे निजी मामलों में मौत मय्यत शादी वगैरह में यह लोग दखल देने लग गए है। आए दिन तब्लीगी जमात के लोग बाहर से आकर कई कई दिनों बस्ती की मस्जिदों में रहते है। जिनका कि पुलिस प्रशासन द्वारा कोई वैरिफिकेशन नहीं करवाया जाता, हमारा प्रशासन से अनुरोध है कि जमात में आने वाले हर व्यक्ति का पुलिस विभाग के द्वारा वैरिफिकेशन करवाया जाए और उनमें से किसी के भी किन्हीं आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने पर उन पर उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाए। भारत देश के संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के मुताबिक भारत के हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है, अतः तब्लीगी जमातियों द्वारा अगर इस तरीके से हमारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किये जाने से अगर कोई विवाद होता है, तो इसके जिम्मेदार वह तब्लीगी जमात के कट्टरपंथी लोगों के मानने वाले लोग होंगे अतः मामलों की उचित जांच करवाने की कृपा करें।
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