नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता /स्वर्गीय कृष्ण कुमार पटेल के पुण्यस्मरण में बाइखेड़ी (डोलरिया) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के श्रीगणेश में कथा व्यास भागवत भूषण आचार्य पुष्कर परसाई ने कथा शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि जो ब्रह्मानंद को प्रदान करे वह कथा है ।अथवा जो मन की व्यथा को मिटाय वह कथा है जो भगवान् की प्राप्ति कराय उसे भी कथा कहते हैं । कथा मनोरंजन का साधन नहीं मनोमंथन का साधन है । जो व्यक्ति श्रीमद्भागवत की कथा पूर्ण मनोयोग से सुनता है उसकी 21 पीढ़िया भगवान् की कृपापात्र हो जाती हैं । परमात्मा प्राप्ति का सबसे सरलतम माध्यम परमात्मा की कथा ही है । कथा हमारे पुण्यों के प्रभाव से नहीं परमात्मा की कृपा से हमे सुनने का अवसर प्राप्त होता । आचार्य श्री ने गौ माता का महात्म्य बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने का साधन गौ सेवा है। श्रीकृष्ण ने गौ को अपना आराध्य मानते हुए पूजा एवं सेवा कर बताया कि गौ सेवक कभी निर्धन नहीं होता। आचार्य श्री ने कहा कि राम मंदिर में जाएं तो भगवान राम के साथ साथ सीता मैया हनुमान जी व राम जी का पूरे दरबार के दर्शन होते है , शिव मंदिर में महादेव सहित पार्वती जी गणेश जी आदि के दर्शन होंगे, किन्तु गौमाता विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहाँ समस्त देवी देवता एक साथ विराजित होते है । आचार्य श्री ने भगवान के नाम की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान का नाम भगवान से भी बड़ा है, भगवान के नाम में अपार सामर्थ्य हैं,भगवान का नाम भगवान को भी दास बना देता है। नरसी मेहता ने भगवान के नाम के प्रभाव से भगवत प्राप्ति कर ली थी। भगवान का नाम एक बार भाव से प्रेम से लेने मात्र से भगवत प्राप्ति हो जाती हैं। कलयुग में भगवान का नाम ही भगवत प्राप्ति का एकमात्र साधन है। सतयुग त्रेता द्वापर में हजारों वर्ष तपस्या करने से योग करने से जो फल प्राप्त नहीं होता था कलयुग में एक बार नाम लेने मात्र से प्राप्त हो जाता है। भागवत का महत्व बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि यदि भागवत जीवित रहते हुए ही नहीं मरने के बाद भी कल्याण कर देती है। मनुष्य ने जीवन भर बात किए हो तो भी भागवत के प्रभाव से वह शुद्ध पवित्र हो जाता है यदि भाव से प्रेम से श्रवण कर ले तो। कथा के आयोजक कुमार पटेल ने अधिक से अधिक संख्या में पधारने का निवेदन किया । उन्होंने बताया कि कथा नित्य दोपहर 1.00 से 4 .00 आयोजित हो रही है।

