टीकमगढ़। कभी-कभी वैसे तो जिला अस्पताल में इलाज को लेकर डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए जाते हैं लेकिन किसी ने आज तक ये पता नही लगाया की आखिर हकीकत क्या है? लेकिन जब डॉक्टर हड़ताल पर गए तब पता चला कि आखिर कमी कहां है। हड़ताल पर गए डॉक्टरों ने अपनी अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि प्रशासनिक हस्तक्षेप की बजह से मरीज के इलाज पर इसका साइड इफेक्ट होता है क्योंकि दबाब की बजह से डॉक्टर्स का दिमाग काम नही करता और किसी भी मरीज के इलाज के लिए डॉक्टर्स का सामान्य होना जरूरी है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप संबंधी मुख्य मांग सहित 03 मांगो को लेकर डॉक्टर्स ने मध्यप्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ के बैनर तले हड़ताल प्रारंभ कर दी है। जिसमे डॉक्टर हरिवल्लभ बड़गैया एबं डॉक्टर दीपक ओझा ने बताया कि हम सभी डॉक्टर्स की मांग है कि डीएसीपी, ओपीएस स्कीम को लागू करना एबं हस्तक्षेप को बन्द किये जाने सबंधी मांग शामिल है। उक्त मांग को लेकर 01 मई को काली पट्टी बांधकर बिरोध किया गया था वहीं 02 मई को आधे दिन की हड़ताल की गई। वहीं हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों का कहना था कि अगर मांग नही मानी गई तो फिर आज 03 मई 2023 से अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ की जाएगी। हड़ताल कर रहे हड़ताल पर बैठे डॉ दीपक ओझा और डॉक्टर एचबी बढ़गईयां ने बताया कि प्रशासनिक हस्तक्षेप का साइड इफेक्ट जो होता है उसका असर मरीज पर भी पड़ता है जब डॉक्टर का दिमाग डिस्टर्ब हो तो मरीज को भी उस प्रकार की सुविधाएं डॉक्टर नहीं दे पाता डॉक्टर्स का फ्री माइंड होना अति आवश्यक है। डॉक्टरों द्वारा हड़ताल करने से जिला अस्पताल में मरीजों को भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा जहां मरीजों की भीड़ एवं इधर-उधर मरीज परेशान भटकते नजर आए।
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