अध्यक्षता रेखा महेश यादव जनपद अध्यक्ष जतारा, विषिष्टअतिथि, श्रद्धा चौहान अध्यक्ष मातृ शक्ति संगठन बृद्धाश्रम समिति टीकमगढ़,श्रीमती रश्मि शुक्ला शैक्षणिक प्रमुख मानवाधिकार एशोसियेशन टीकमगढ़,सुषमा संजय नायक उपाध्यक्ष नगरपालिका टीकमगढ अतिथि , एन.डी.सोनी प्रकाश अग्रवाल प्रदेश उपाध्यक्ष वैश्य महासम्मेलन वीरेन्द्र सिघई अशोक गगेल , वीरेंद्र चन्द्रसोरिया ,घनश्याम तैलंग अखिलेश खरे स्टेट बैक, निखिल र्शमा गिरधारीलाल कबीरपंथी, स्पनिल तिवारी ,मनमोहन नामदेव ,कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र चन्दसौरिया सहित गणमान्यजनो की गरिमामय उपस्थित मे देवआस्था पुस्तकालय द्धारा पं. हरिविष्णुअवस्थी को –बुन्देली संस्कृति के आचार्य —की उपाधि से सम्मानित किया ,प्रियंका पवनघुवारा संचालक देवआस्था पुस्तकालय द्धारा विज्ञप्ति मे बताया कि बुन्देलखण्ड की संस्कृति के उन्नायक पं. हरिविष्णु अवस्थी चक्षुष्मत्ता सम्मान एक साहित्यिक व्यक्ति यथार्थ में बुन्देली संस्कृति के साक्षात् स्वरुप है,आपके रहन सहन व जीवन में बुन्देली की संपूर्ण संस्कृति के स्वरूप का साक्षात्कार किया जा सकता है। उल्लेखनीय है आदरणीय पं. हरिविष्णु अवस्थी का जन्म फाल्गुन कृष्ण पंचमी 1990 15 फरवरी टीकमगढ़ सं.1933 माता-पिता स्व. काशीबाई’ स्व.रामकिशोर के घर एवं धर्मपत्नी स्व. रमा अवस्थी आप दिनांक 27 जुलाई 1949 को शिक्षा विभाग में शिक्षक, ए.डी.आई. एस. के पद से सन् 1994 में सेवानिवृत हो गये थे आपके सार्थक प्रयासो से 300 से अधिक पत्र पत्रिकाओं, स्मारिकाओं, अभिनन्दन ग्रंथों का प्रकाशन है। प. अवस्थी ने बुंदेलखंड के लोक सहित्य, संस्कृति, कलाओं, इतिहास, पुरातत्व, आदि का प्रामाणिक परिचय देश-समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है। गोरतलब है आपकी प्रकाशित पुस्तकें मुख्यतः बुंदेलखंड के शिलालेख प्रथम भाग,बुंदेलखंड मे गाँधी जी की यात्राएँ एवं देशी राज्यों में स्वतंत्रता संग्राम ,जल प्रबंधन बुंदेलखंड की पारंपरिक जल संरचनाएँ,नवागढ़ का इतिहास, कहत कबीर सुनो भाई साधौ ,संत कबीर,झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, बुंदेलखंड के अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संयुक्त लेखन ,बुंदेलखंड की कवयित्रियाँ स्वतंत्रता संग्राम,सोने की चिड़िया बुंदेली कहानियाँ,वीरसिंह देव पुरस्कार का इतिहास! वही अवस्थी द्धारा महत्वपूर्ण सम्पादित ग्रंथ भी किये गये,ओरछेश वीरसिंह जूदेव द्वितीय गौरव ग्रंथ,दादा मगनलाल गोइल अभिनन्दनग्रंथ, मधुकर युग निर्मात्री पत्रिका की विवरणी, बुन्देलखंड समग्र ,मधुघट ,बल्देवगढ़ दर्शन, उल्लेखनीय नव्वे वर्ष की अवस्था मे भी उनमें मानसिक और शारीरिक शैथल्य दिखाई नहीं देता। वे सदैव पुस्तकों में उलझे व्यस्त दिखाई देते हैं। कहते हैं कि दूध के दांत निकल रहे हैं। वे शतायु होकर साहित्य की बहुत सेवा करना चाहते हैं। आज भी अवस्थी द्धारा इस ऊम्र के पडाव के बीच प्रकाशनाधीन ग्रंथ विषपायी हरदौल कला साम्राज्ञी रायप्रवीण ओरछा का यशस्वी राज, बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व के साधक प. हरिविष्णु अवस्थी का बुन्देली संस्कृति केआचार्य की उपाधि से सम्मानित करते हुए देवआस्था पुस्तकालय परिवार भी ईश्वर के चरणों में प्रार्थना करता है उत्तम स्वास्थ्य एवं सतत सक्रियता उनकी बनी निरंतर गतिशील और यशस्वी हो और उनकी कलम ऐसी ही चलती रहे।उपस्थित जनो लौहपुरुष स्व.कपूर चन्द्र घुवारा पूर्व विधायक के भी संस्मरणों को याद के साथ चित्र पर पुष्प अर्पित किये कार्यक्रम का संचालन भूमिपुत्र पवनघुवारा ने कर सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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बुन्देली संस्कृति के आचार्य की उपाधि से पं.हरिविष्णु अवस्थी को किया गया सम्मानित ऋतु पंचमी के पावन दिवस पर आयोजित किया देवआस्था पुस्तकालय ने कार्यक्रम
अध्यक्षता रेखा महेश यादव जनपद अध्यक्ष जतारा, विषिष्टअतिथि, श्रद्धा चौहान अध्यक्ष मातृ शक्ति संगठन बृद्धाश्रम समिति टीकमगढ़,श्रीमती रश्मि शुक्ला शैक्षणिक प्रमुख मानवाधिकार एशोसियेशन टीकमगढ़,सुषमा संजय नायक उपाध्यक्ष नगरपालिका टीकमगढ अतिथि , एन.डी.सोनी प्रकाश अग्रवाल प्रदेश उपाध्यक्ष वैश्य महासम्मेलन वीरेन्द्र सिघई अशोक गगेल , वीरेंद्र चन्द्रसोरिया ,घनश्याम तैलंग अखिलेश खरे स्टेट बैक, निखिल र्शमा गिरधारीलाल कबीरपंथी, स्पनिल तिवारी ,मनमोहन नामदेव ,कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र चन्दसौरिया सहित गणमान्यजनो की गरिमामय उपस्थित मे देवआस्था पुस्तकालय द्धारा पं. हरिविष्णुअवस्थी को –बुन्देली संस्कृति के आचार्य —की उपाधि से सम्मानित किया ,प्रियंका पवनघुवारा संचालक देवआस्था पुस्तकालय द्धारा विज्ञप्ति मे बताया कि बुन्देलखण्ड की संस्कृति के उन्नायक पं. हरिविष्णु अवस्थी चक्षुष्मत्ता सम्मान एक साहित्यिक व्यक्ति यथार्थ में बुन्देली संस्कृति के साक्षात् स्वरुप है,आपके रहन सहन व जीवन में बुन्देली की संपूर्ण संस्कृति के स्वरूप का साक्षात्कार किया जा सकता है। उल्लेखनीय है आदरणीय पं. हरिविष्णु अवस्थी का जन्म फाल्गुन कृष्ण पंचमी 1990 15 फरवरी टीकमगढ़ सं.1933 माता-पिता स्व. काशीबाई’ स्व.रामकिशोर के घर एवं धर्मपत्नी स्व. रमा अवस्थी आप दिनांक 27 जुलाई 1949 को शिक्षा विभाग में शिक्षक, ए.डी.आई. एस. के पद से सन् 1994 में सेवानिवृत हो गये थे आपके सार्थक प्रयासो से 300 से अधिक पत्र पत्रिकाओं, स्मारिकाओं, अभिनन्दन ग्रंथों का प्रकाशन है। प. अवस्थी ने बुंदेलखंड के लोक सहित्य, संस्कृति, कलाओं, इतिहास, पुरातत्व, आदि का प्रामाणिक परिचय देश-समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है। गोरतलब है आपकी प्रकाशित पुस्तकें मुख्यतः बुंदेलखंड के शिलालेख प्रथम भाग,बुंदेलखंड मे गाँधी जी की यात्राएँ एवं देशी राज्यों में स्वतंत्रता संग्राम ,जल प्रबंधन बुंदेलखंड की पारंपरिक जल संरचनाएँ,नवागढ़ का इतिहास, कहत कबीर सुनो भाई साधौ ,संत कबीर,झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, बुंदेलखंड के अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संयुक्त लेखन ,बुंदेलखंड की कवयित्रियाँ स्वतंत्रता संग्राम,सोने की चिड़िया बुंदेली कहानियाँ,वीरसिंह देव पुरस्कार का इतिहास! वही अवस्थी द्धारा महत्वपूर्ण सम्पादित ग्रंथ भी किये गये,ओरछेश वीरसिंह जूदेव द्वितीय गौरव ग्रंथ,दादा मगनलाल गोइल अभिनन्दनग्रंथ, मधुकर युग निर्मात्री पत्रिका की विवरणी, बुन्देलखंड समग्र ,मधुघट ,बल्देवगढ़ दर्शन, उल्लेखनीय नव्वे वर्ष की अवस्था मे भी उनमें मानसिक और शारीरिक शैथल्य दिखाई नहीं देता। वे सदैव पुस्तकों में उलझे व्यस्त दिखाई देते हैं। कहते हैं कि दूध के दांत निकल रहे हैं। वे शतायु होकर साहित्य की बहुत सेवा करना चाहते हैं। आज भी अवस्थी द्धारा इस ऊम्र के पडाव के बीच प्रकाशनाधीन ग्रंथ विषपायी हरदौल कला साम्राज्ञी रायप्रवीण ओरछा का यशस्वी राज, बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व के साधक प. हरिविष्णु अवस्थी का बुन्देली संस्कृति केआचार्य की उपाधि से सम्मानित करते हुए देवआस्था पुस्तकालय परिवार भी ईश्वर के चरणों में प्रार्थना करता है उत्तम स्वास्थ्य एवं सतत सक्रियता उनकी बनी निरंतर गतिशील और यशस्वी हो और उनकी कलम ऐसी ही चलती रहे।उपस्थित जनो लौहपुरुष स्व.कपूर चन्द्र घुवारा पूर्व विधायक के भी संस्मरणों को याद के साथ चित्र पर पुष्प अर्पित किये कार्यक्रम का संचालन भूमिपुत्र पवनघुवारा ने कर सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

