देश के मध्यप्रदेश,टीकमगढ़ जिले के हटा गांव की रहने वाली ग्रामीण अंचल की एक 17 वर्षीय खुशी जैन अपनी चित्रकला से कर रहीं है अपने गांव जिला और प्रदेश का नाम रौशन आज हम आपको मिलवाएंगे एक 17 वर्षीय युवा कलाकार से जो सुंदर चित्र बनाने में माहिर हैं। खुशी जैन मध्यप्रदेश की टीकमगढ़ के हटा गांव की रहने वाली हैं,उनकी माता का नाम मनीषा जैन और पिता का नाम वीरेंद्र जैन है।उनका एक बहुत छोटा सा गांव है, उन्होंने श्री दिगंबर जैन महिला आश्रम सागर मध्यप्रदेश स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की है। उनकी उम्र केवल 17 साल है। उन्हें बचपन से ही रेखाचित्र बनाने का शौक है, वह बड़ी होकर कलाकार बनना चाहती हैं बहुत छोटी ही उम्र से पेंटिंग करना सीख गयीं थी। स्कूल जाकर उन्हें अपनी इस कला को और निखारने का मौका मिला। खुशी जैन अपनी इस प्रतिभा के माध्यम से अबतक कई प्रभावशाली चित्र खासकर सामाजिक समस्याओं पर चित्रकला बना चुकी हैं। खुशी जैन को घर के साथ-साथ स्कूल में भी अपनी इस कला को आगे बढ़ाने का पूरा सहयोग मिलता रहा। उनकी टीचर्स उन्हें हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित करती हैं|खुशी अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिजनों और अपने गुरुजनों को देती है| खुशी जैन बताती हैं कि एक चित्रकला बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि जिस पेपर पर तस्वीर बनाई जाए वो काफी मोटा हो, इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि पेंट शुरू करने से पहले पेंसिल से एक आउटलाइन जरूर बना लें। अपनी कला को लेकर बेहद कॉफिडेंट हैं और उन्हें यकीन है कि अगर उन्होंने और मेहनत की तो वो और अच्छी चित्रकार बन सकती हैं।खुशी जैन की बनाई गई चित्रकला और पेंटिंग कलाकृतियाँ देख किसी को यकीन नही होता की महज 17 साल की उम्र मे ग्रामीण अंचल की रहने वाली गांव की बेटी ऐसा मनोहारी कला का प्रदर्शन कर सकती है।वह अपनी चित्रकला और पेंटिंग की कलाकृतियों से ऐतिहासिक विश्व पटल पर भारत की प्रसिद्ध चित्रकला को कायम रखना चाहती है।
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खुशी जैन अपनी चित्रकला से कर रहीं है गांव सहित मध्यप्रदेश का का नाम रोशन
देश के मध्यप्रदेश,टीकमगढ़ जिले के हटा गांव की रहने वाली ग्रामीण अंचल की एक 17 वर्षीय खुशी जैन अपनी चित्रकला से कर रहीं है अपने गांव जिला और प्रदेश का नाम रौशन आज हम आपको मिलवाएंगे एक 17 वर्षीय युवा कलाकार से जो सुंदर चित्र बनाने में माहिर हैं। खुशी जैन मध्यप्रदेश की टीकमगढ़ के हटा गांव की रहने वाली हैं,उनकी माता का नाम मनीषा जैन और पिता का नाम वीरेंद्र जैन है।उनका एक बहुत छोटा सा गांव है, उन्होंने श्री दिगंबर जैन महिला आश्रम सागर मध्यप्रदेश स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की है। उनकी उम्र केवल 17 साल है। उन्हें बचपन से ही रेखाचित्र बनाने का शौक है, वह बड़ी होकर कलाकार बनना चाहती हैं बहुत छोटी ही उम्र से पेंटिंग करना सीख गयीं थी। स्कूल जाकर उन्हें अपनी इस कला को और निखारने का मौका मिला। खुशी जैन अपनी इस प्रतिभा के माध्यम से अबतक कई प्रभावशाली चित्र खासकर सामाजिक समस्याओं पर चित्रकला बना चुकी हैं। खुशी जैन को घर के साथ-साथ स्कूल में भी अपनी इस कला को आगे बढ़ाने का पूरा सहयोग मिलता रहा। उनकी टीचर्स उन्हें हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित करती हैं|खुशी अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिजनों और अपने गुरुजनों को देती है| खुशी जैन बताती हैं कि एक चित्रकला बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि जिस पेपर पर तस्वीर बनाई जाए वो काफी मोटा हो, इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि पेंट शुरू करने से पहले पेंसिल से एक आउटलाइन जरूर बना लें। अपनी कला को लेकर बेहद कॉफिडेंट हैं और उन्हें यकीन है कि अगर उन्होंने और मेहनत की तो वो और अच्छी चित्रकार बन सकती हैं।खुशी जैन की बनाई गई चित्रकला और पेंटिंग कलाकृतियाँ देख किसी को यकीन नही होता की महज 17 साल की उम्र मे ग्रामीण अंचल की रहने वाली गांव की बेटी ऐसा मनोहारी कला का प्रदर्शन कर सकती है।वह अपनी चित्रकला और पेंटिंग की कलाकृतियों से ऐतिहासिक विश्व पटल पर भारत की प्रसिद्ध चित्रकला को कायम रखना चाहती है।

