नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता / आगामी विधानसभा चुनाव भाजपा को जीत के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि अब ना तो भाजपा की लहर है ना शिवराज सिंह की बोली का जादू। क्योंकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जहां भी जाते हैं कुछ ना कुछ घोषणा कर देते हैं और उन घोषणाओं पर आगे कोई भी अमल नहीं होने से उनकी घोषणाओ को जनता अच्छी तरह सब समझ चुकी है। हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भोपाल आगमन पर उनके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी दिल्ली गये। जिससे यह संकेत लग रहे हैं कि प्रदेश की राजनीति में कुछ बदलाव हो सकता है। जिस तरह एक के बाद एक घोटाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नेतृत्व वाली सरकार में हुए है, उससे भाजपा की छवि बिगड़ी है। शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव के पहले लाडली बहना योजना लाकर चुनावी गणित अपने पक्ष में करने का प्रयास तो किया है लेकिन यह दाँव कहां तक सार्थक होगा यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा । वहीं पिछली बार विधान सभा जीतकर प्रदेश में आई कांग्रेस की सरकार अपने ही 20 विधायकों के कारण ही सत्ता से हाथ गवां बैठी। इस बार कांग्रेस सत्ता में आने के लिए कोई गलती नहीं करेंगी । वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छवि साफ-सुथरी है, जिसका फायदा इस वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है ।

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