टीकमगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ में आज 28वीं. वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक डॉ. संजय वैशंपायन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कार्यालय संचालक विस्तार सेवायें, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, डॉ. डी.एस. तोमर, डॉ. एम.के. नायक, डॉ. एम.एल. बल, डॉ. ऐ.के. श्रीवास्तव, कार्यालय सहायक संचालक उद्यान कमलेश अहिरवार, कार्यालय सहायक संचालक मत्स्य प्रभाकर टिकरया, डी.डी.एम. नाबार्ड, मिर्जा फैजल बैग, म.प्र. बीज प्रमाणीकरण अधिकारी अजय पाटीदार एवं कमल सिंह करटे, क्षेत्रीय अधिकारी इफको इंदर सिंह मेवाडा, सुजान सिंह,बीज उत्पादक सहकारी समिति मर्यादित के प्रतिनिधि धर्नेन्द्र सिंह यादव, महिला कृषक उत्पादक संगठन नीतेश चतुर्वेदी, स्व सहायता समूह के सदस्य राजेन्द्र अहिरवार, रजनी नोनटकर, कृष्णा देवी ठाकुर, रिहाना खान एवं प्रगतिशील कृषकों में शिवकुमार नायक, मथुरा प्रसाद कुशवाहा, देवी सिंह ठाकुर, मुन्नी लाल यादव पतंजलि सेवा समिति, आदि ने भाग लिया। केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बी.एस. किरार, वैज्ञानिक, डॉ. आर.के. प्रजापति, डॉ. यू.एस. धाकड़, डॉ. एस.के. जाटव, डॉ. आई.डी. सिंह, जयपाल छिगारहा एवं हंसनाथ खान द्वारा केंद्र के तकनीकी पार्क एवं प्रदर्शन इकाईयों का भ्रमण कराया गया। डॉ बी.एस. किरार ने कृषि विज्ञान केंद्र की वर्ष 2022-23 की गतिविधियों की प्रगति और खरीफ 2023 की गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया। डॉ. संजय वैशंपायन द्वारा सभी विभागों के अधिकारियों को सुझाव दिये गये कि लघुधान्य फसलें (श्री अन्न) एवं प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम करें। किसानों के लिए चलाए जा रहे विस्तार कार्यक्रमों में के.वी.के. के वैज्ञानिकों को आवश्यक रूप से बुलाना चाहिए जिससे फसलों की उन्नत तकनीक का अधिक से अधिक फैलाव हो सके और जिले की प्रमुख फसलों की नई किस्में अधिक फैलें जिससे किसानों का उत्पादन बढ़े। के.वी.के. और कृषि विभाग संयुक्त रूप से तिलहनी फसलों पर प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का आयोजन करे, जिससे तिलहन का उत्पादन बढ़े। उद्यान विभाग के वैज्ञानिक फलदार पौधों के रोपण पर किसानों को तकनीकी सलाह देवें। जिले की प्रमुख फसलों की नई नई किस्में बढ़ाने, जल की उपयोगिता बढ़ाने हेतु सूक्ष्म सिंचाई की विधियों एवं नैनो यूरिया के उपयोग बढ़ाने पर जागरूकता हेतु प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का आयोजन किया जाए। बीज उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य द्वारा जिले की प्रमुख फसलों की नई नई किस्म के बीज स्त्रोत एवं उपलब्धता के बारे में अवगत कराया जाए। नाबार्ड डी.डी.एम. द्वारा कृषक उत्पादक संगठनों में जिले की मुख्य फसलों के बीजोत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं बाजारीकरण से अधिक से अधिक सदस्यों को लाभान्वित करायें। महिला स्व-सहायता समूह द्वारा ज्यादा मशरूम प्रशिक्षण करवाए जाये एवं समूह के सदस्यों ने कहा कि उद्योग या अन्य विभाग से ऋण की व्यवस्था होने पर स्व-सहायता समूह और अच्छा रोजगार विकसित कर सकता है। डॉ. डी.एस. तोमर ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र जिले में कृषि आधारित विभागों के विस्तार गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित कर नई तकनीकों को फैलाने का सक्रिय कार्य कर रहा है और भविष्य में नई किस्मों, नैनो यूरिया, सूक्ष्म सिंचाई विधियां एवं एकीकृत फसल पद्धति पर विशेष किसानों को तकनीकी से अवगत करायें।

