टीकमगढ़। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग का द्वारा बुंदेली गौरव गान लक्ष्मी प्रसाद मिस्त्री की स्मृति में व्याख्यान माला एवं कवि सम्मेलन का अयोजन किया गया इस गरिमामय कार्यक्रम की वरिष्ठ साहित्यकार हरिविष्णु अवस्थी ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ विकास दवे रहे जबकि व्याख्यान वरिष्ठ बुंदेली कवि श्री प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने दिया।
प्रथम सत्र में प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने लक्ष्मी प्रसाद मिस्त्री की स्मृति प्रसंग अपना व्याख्यान दिया और श्री मिस्त्री की रचनाओं का सुमधुर कंठ से वाचन किया।अपने अध्यक्षीय उद्वोधन मेंहरिविष्णु अवस्थीने बताया कि रमा को बुन्देली माटी का लाड़ला रचनाधर्मी माना जाता है। ये मुंशी प्रेमचन्द्र के समकालीन माने जाते है। अपने स्वागत भाषण में निदेशक डाॅ विकास दवे ने कहा कि लक्ष्मी प्रसाद मिस्त्री हमारे बुन्देलखण्ड के ऐसे साहित्यकार रहे है जिन्होंने अपना सारा जीवन लोक संस्कृति एवं बोलियों में लगा दिया है। परन्तु इन्हें भूला दिया गया है साहित्य अकादमी ने ऐसे विस्मृत साहित्यकार को स्मरण करने के लिए यह आयोजन टीकमगढ़ में किया है।
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसका संचालन राजीव नामदेव ने किया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ राजीव नामदेव ने सरस्वती वंदना से किया। मेरी माँ मुझको वर देना करूँ मैं ज्ञान की बाते। जुवाँ पर नाम तेरा हो कलम शान की बातें। रविन्द्र यादव ने रचना पढ़ी-दुनिया में कुछ लोग बहुत ही अच्छे है।दुनिया को बदनाम नहीं कर सकते हम। डाॅ गणेश राय ने बुन्देनी में हास्य रचनाएँ सुनाकर खूब वाह वाही लूट तुम ई में न परो अंधकार बस्ती को मिटाबै के लानें घर हमें अपनों तिनका-तिनका जलाने। । अंत में साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ विकास दवे ने कार्यक्रम की सफलता पर स्थानीय संयोजक में राजीव नामदेव को हार्दिक बधाई दी।
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