टीकमगढ़ । जहां एक और आदिवासियों के विकास और उनके उत्थान को लेकर मध्य प्रदेश शासन नीचे से लेकर ऊपर तक पूरी ताकत लगा रहा है वहीं दूसरी ओर इन आदिवासियों के साथ ऐसे ऐसे हास्य हो रहे हैं जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि शासन जिला प्रशासन इस ओर सुस्त है जहां ऐसा ही एक माजरा रविवार को जिला मुख्यालय के अस्पताल चौराहे पर देखने को मिला जहां आदिवासी कार्यवाही को लेकर चौराहे पर धरना देकर बैठ गए मामला यह है कि जिले के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र के मिडोरा गांव के आदिवासी परिवारों ने रविवार दोपहर अस्पताल चौराहे पर जाम लगा दिया। महिलाएं और पुरुष चौराहे पर धरना देकर बैठ गए। इस दौरान सड़क के दोनों ओर जाम लग गया। जानकारी लगते ही तुरंत कोतवाली और देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची। धरने पर बैठे आदिवासियों को समझा कर एसपी दफ्तर ले गए। मिडोरा गांव निवासी विनय आदिवासी ने बताया कि रविवार 16 जुलाई 2023 की सुबह करीब 9.30 बजे गांव के ही करीब एक दर्जन लोगों ने हमारे कच्चे मकान और झोपड़ी गिराकर मारपीट कर दी। इसके अलावा हमारा सामान भी उठाकर ले गए। आदिवासी परिवारों ने बताया कि करीब 10 साल से वह वन विभाग की जमीन पर झोपड़ी बनाकर निवास कर रहे हैं। गांव में मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों का भरण पोषण कर रहे हैं। गांव के कुछ दबंग लोग उस जमीन पर खेती करना चाहते हैं। इसलिए जबरन हमें हटा कर भगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत मोहनगढ़ थाने में दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद टीकमगढ़ आकर अस्पताल चौराहे पर धरना देकर बैठ गए। पुलिस ने पीड़ित परिवारों के आवेदन लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है जाम लगने की खबर लगते ही मौके पर कोतवाली टीआई मनीष कुमार और देहात थाना प्रभारी प्रीति भार्गव पहुँचे और उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यलय ले गए जहां आदिवासी परिवारों की शिकायत सुनी। इसके बाद एसडीओपी प्रिया सिंधी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों को न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराकर उन लोगों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी जहां इन आदिवासियों को कार्यवाही का पूरा भरोसा दिलाया गया है।

