टीकमगढ़ । नगर की साहित्य संस्था मध्यप्रदेश लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 301वीं कवि गोष्ठी, जय बुन्देली साहित्य समूह टीकमगढ़ के व्हाट्स एप ग्रुप पर ऑन लाईन आडियो गोष्ठी के रूप में आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में बुढेरा के वरिष्ठ कवि गोकुल प्रसाद यादव उपस्थित रहे। वहीं अध्यक्षता सुभाष सिंघई जतारा द्वारा की गई। जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में भगवान सिंह लोधी हटा दमोह मौजूद रहे। कवि गोष्ठी का संचालन संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव किया।
कवि गोष्ठी काशुभांरभ सरस्वती वंदना से वीरेन्द्र चंसौरिया ने जय होतुम्हारी जय हो तुम्हारी संगीत विद्या ज्ञान की देवी से किया। बुढे़रा के गोकुल प्रसाद यादव ने रचना पढ़ी ओ पुतरा हरौ मिजाज नैं करौ हम सोउ हलके रए हम बड़ेनोइँ पैदा भए। सो ओ बेटा हरौ बूडन खों नैं चिंदरौ। वहीं जतारा के कवि सुभाष सिंघई ने बुंदेली दोहा साबन भादों माह में हौ जमकै बरसात। गीले रातइ खेत है फसल हँसेदिन-रात सुनाया। हटा के भगवान सिंह ने रिम-झिम बरसन लगे बदरवा आली री ना आए चितचोर। हरियाली सें धरा हरीं भई बोलत चातक मोर और बल्दवेगढ़ के प्रमोद मिश्रा ने अषाढ़ काबुन्देली गीत जुरमिल आए बदरा गजन लगे। लगरव इन्द्र नगाड़े बजन लगे सुनाया। फरीदाबाद के विद्या चौहान ने माहिया पातीघन की बाचे,डाली से उतरी बरखा छम छम नाचे पढ़ा। दोह के सरस कुमार ने कविता सुनाई बहारेंमौज करती फिर रहीं है आज सावन में सुनाया। इसके साथ ऑन लाईन मौजूद सभी कवियों तथा रचनाकारों ने अपनी अपनी रचनाएं व कविताएं पढ़ी।
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