टीकमगढ़ । प्रकरण की जानकारी देते हुए मामलें में मीडिया सेल प्रभारी एनपी पटेल ने प्रेस को प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि उक्त मामला थाना ओरछा जिला निवाड़ी का जघन्य एवं सनसनीखेज चिन्हित मामला था जो माननीय विशेष न्यायाधीश एस.सी.,एस.टी. एक्ट, टीकमगढ़ के न्यायालय में विचाराधीन था, जिसमें आज दिनांक 22.07.2023 को निर्णय पारित करते हुए अभियुक्तगण पवन राजपूत एवं सीतराम राजपूत को माननीय न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध ठहराते हुए धारा 120बी भा.दं.सं. के लिये धारा 115 भा.दं.सं. के आलोक में 14 – 14 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड, धारा 201 सहपठित धारा 120 भा.दं.सं. में 07 – 07 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड, धारा 193 सहपठित धारा 120बी भा.दं.सं. में 03 – 03 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड तथा धारा 3(2)भी एस.सी./एस.टी. एक्ट में प्रत्येक को आजीवन कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।— घटना का संक्षिप्त विवरण— – जिसका फोन शाम 06:00 बजे के बाद से नहीं लगा । जब वह दिनांक 19.03.2020 को थाना बवीना लड़के की तलाश एवं जानकारी के सिलसिले में गया तो उसे थाना बवीना से जानकारी मिली कि वनगांय के पास अधजली लाश पड़ी है, जिसके बाद वह बताई गई जगह पर पहुंचा तो देखा कि सड़क के किनारे उसके लड़के पवन राजपूत की लाश अधजली अवस्था में पड़ी है तथा उसके कपड़े व जूते रखे हैं। सीताराम राजपूत द्वारा दी गई सूचना के बाद थाना ओरछा में मर्ग इंटीमेशन लेख किया जाकर जांच कार्यवाही प्रारंभ की गई । घटना स्थल पर शव से एक हाफ शर्ट, जींस पेंट, बुडलेंड का बैल्ट, काले रंग का पर्स, दो एटीएम, ड्राईविंग लाईसेंस, काले व पीले रंग के कैम्पस कंपनी के जूते व मोजे, घड़ी, प्लास्टिक की खाली बोतल, माचिस जप्त की गई । शव का पी.एम. कराया गया । शार्ट पी.एम. रिपोर्ट में मृत्यु का कारण जलाकर हत्या किये जाने की संभावना जताये जाने पर थाना ओरछा में अज्ञात आरोपी के विरूद्ध धारा 302, 201 भादवि. के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध कर मामले की विवेचना की गई । विवेचना के दौरान साईबर सेल से प्राप्त सीडीआर रिपोर्ट से ज्ञात हुआ कि घटना दिनांक को पवन राजपूत ने नीरज परिहार से संपर्क किया था एवं टावर लोकेशन एक की स्थान की पाये जाने पर यह भी सिद्ध पाया गया कि दोनों आपस में मिले थे उसके बाद घटना कारित हुई है । साईबर सेल से प्राप्त सीडीआर रिपोर्ट से यह भी ज्ञात हुआ कि तथाकथित मृतक पवन राजपूत के पिता सीताराम राजपूत एवं परिवारजन की कोटा के एक नंबर पर कई बार बात हुई है । जिसके उपरांत कोटा राजस्थान में पुलिस टीम भेजकर अज्ञात आरोपी की तलाश की गई लेकिन आरोपी का पता नहीं चला, तभी मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि मृतक पवन राजपूत अभी जिंदा है और वह बुंदेला बाबा मंदिर चकरपुर में खड़ा हुआ है, मौके पर जाकर मृतक पवन राजपूत को पकड़ा उससे नाम पता पूँछा तो उसने अपना नाम पवन राजपूत होना बताया । उससे घटना के संबंध में विस्तार से पूँछतांछ किये जाने पर बताया कि उसका टी.व्ही.एस. मोटरसाईकिल का शोरूम बवीना में है, मोटरसाईकिल से संबंधित आरटीओ का काम नीरज परिहार निवासी जिला दतिया से कराता था । उसने बीमा कंपनियों से अपनी अलग-अलग बीमा पॉलिसी क्रमश: एक करोड़, 20 लाख एवं डेढ़ करोड़ रूपये की कराई थी जिसका क्लेम लेने हेतु सोची समझी साजिश के तहत दिनांक 18.02.2020 को अपने दोस्त की कार से झांसी गया वहां अपने दोस्त नीरज परिहार को बुलाकर उसे शराब पिलाई व उसका गला दबा दिया जिससे वह बेहोश हो गया फिर कार से उसे वनगांय ओरछा रोड पर ले गया और वहां पर रोड के किनारे नीरज को कार से खींचकर गिरा दिया व पेट्रोल डालकर आग लगाकर उसकी हत्या कर दी व उसकी पहचान छिपाने व अपनी पहचान देने उसने अपने कपड़े व जूते शव के पास रख दिये और उसके जलाने से पहले उसने अपनी घड़ी नीरज के वांये हाथ में पहना दी थी, अपनी पहचान के कागजात भी उसने मौके पर छोड़ दिये थे । अभियुक्त पवन राजपूत द्वारा बताये गये तथ्यों के आधार पर नीरज परिहार के माता-पिता का ब्लड सेंपल एवं मृतक के सैंपल का डीएनए परीक्षण कराया गया जिससे स्पष्ट हुआ कि मरने वाला व्यक्ति नीरज परिहार ही था । उपरोक्त तथ्यों के आधार पर प्रकरण में मृतक नीरज परिहार की हत्या करने एवं साक्ष्य छिपाने के आरोप में अभियुक्त पवन राजपूत एवं उसके पिता सीताराम राजपूत को गिरफ्तार कर प्रकरण में आवश्यक अनुसंधान उपरांत विचारण किये जाने हेतु अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया । माननीय न्यायालय द्वारा प्रकरण में संपूर्ण विचारण उपरांत अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्कों से सहमत होते हुए अभियुक्तगण को दोषसिद्ध ठहराते हुए पवन राजपूत एवं सीतराम राजपूत को माननीय न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध ठहराते हुए धारा 302 सहपठित धारा 120बी भा.दं.सं. में दोनों आरोपी को आजीवन कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड, धारा 120बी भा.दं.सं. के लिये धारा 115 भा.दं.सं. के आलोक में 14 – 14 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड, धारा 201 सहपठित धारा 120 भा.दं.सं. में 07 – 07 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड, धारा 193 सहपठित धारा 120बी भा.दं.सं. में 03 – 03 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 5 – 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड तथा धारा 3(2)भी एस.सी.,एस.टी. एक्ट में प्रत्येक को आजीवन कारावास एवं 5 – 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है

