टीकमगढ़। शहर की नंदीश्वर कॉलोनी में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य क्षुल्लक 105 नय सागर जी महाराज का 37 वा, पावन वर्षा योग चल रहा है। क्षुल्लक जी के द्वारा आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी में प्रतिदिन शांति धारा कराई जा रही है।आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी की प्रतिष्ठा मुनि पुंगव श्री 108 सुधा सागर जी महाराज द्वारा पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान की गई थी। प्रतिष्ठा के बाद सैकड़ो लोग प्रातः काल मंदिर की में पहुंचकर श्री जी का अभिषेक शांति धारा एवं पूजन कर अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं।बुधवार को प्रातः क्षुल्लक जी द्वारा केश लौच किये गए । जैन साधु एवं साध्वी के लिए केश लौच के बारे में शास्त्रो में बताया गया कि उत्कृष्ट 2 माह, मध्यम तीन माह जघन्य 4 माह में केश लोचन की किया क्रिया संपन्न करते हैं। जैन साधु अयाचक वृत्ति बाले होने से आत्मबल की परीक्षा हेतु यह क्रिया करते है। तदुप्रांत महाराज श्री ने प्रवचन में भगवान महावीर के पंच सिद्धांतों पर प्रकाश डाला अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह जिसमें एक सामान्य मनुष्य को नेक इंसान बनने के गुण सिखाए। उन्होंने कहा कि श्रावक को प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए स्वाध्याय करने से मन में दृढ़ता आती है। वैराग्य मजबूत होता है निर्मल ज्ञान की वृद्धि होने से व्यक्ति संयम की ओर आगे बढ़ता है ।स्वाध्याय मात्र शब्दों से नहीं और शब्दों तक नहीं अर्थ की गहराई से होना चाहिए। स्वाध्याय भाषा से नहीं भावो से होना चाहिए। उच्चारण में नहीं आचरण में स्वाध्याय होना चाहिए। कुछ लोग कहते हैं महाराज स्वाध्याय करने में मन नहीं लगता स्वाध्याय करने का भाव नहीं होता परिणाम नहीं बन पाते हैं। जिन लोगों का स्वाध्याय में मन नहीं लगता उनके जीवन के परिणाम कभी अच्छे नहीं हो सकते। महाराज जी ने कहा कि हमें स्वाध्याय में अपना मन लगाना है मन को स्थिर करना है तभी हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। प्रेस को यह तमाम जानकारी नगर की नंदीश्वर कॉलोनी निवासी प्रदीप जैन बम्होरी वालों ने व्हाट्सएप के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है।

