टीकमगढ़। जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में आज आज राय नर्सिग काॅलेज टीकमगढ़ के सहयोग से कार्यषाला का आयोजन किया गया जिसमें काॅलेज के 80 से अधिक छात्र-छात्राओं द्वारा उत्साह पूर्वक भाग लिया गया। चूंकि डेंगू बीमारी के षहर में लगभग 8 प्रकरण पंजीकृत हो चुके है इनके अतिरिक्त कुछ प्रकरण कार्ड टेस्ट के भी प्रकाष में आये है इन्हे ध्यान में रखकर कार्याषाला आयोजित की गई। कार्यषाला में गैम्बूसिया मछली का भी प्रदर्षन किया गया। यह मछली मच्छर के लार्वा को खाने में सक्षम है, जिससे वैक्टर जनित बीमारियों के नियंत्रण में मदद मिलती है। मलेरिया कार्यालय में यह सेवा निःषुल्क उपलब्ध है। जिले में एक प्लांन बनाकर जल स्त्रोतों में गैम्बूसिया मछली का संचयन किया जा रहा है। प्रो. नीरज पारासर राय नर्सिंग काॅलेज द्वारा बताया गया कि वास्तव में डेंगू बुखार में केवल 7 दिन तक की सावधानी रखने की आवष्यकता है। बुखार आने के 7 दिन तक प्लेटलेट्स गिरती जाती है और तत्पष्चात् स्वतः बढ़ने लगती है। इस दषा में दर्द निवारक का उपयोग नही करना चाहिए और मच्छरदानी का उपयोग जरूरी है। ठंड लगने के साथ तेज बुखार आने पर तुरंत अस्पताल,स्वास्थ्य कार्यकर्ता सें सम्पर्क करें। डाॅक्टर की परामर्ष से दवा लें शरीर पर लाल चकते, तेज बुखार, आॅखे घुमाने में दर्द होने पर अस्पताल में खून की जाॅच करावें और प्लेट्लेट्स कम आने पर जिला अस्पताल में डेंगू की निषुल्क एलाइजा जाॅच के लिए तत्काल सम्पर्क करें। डीएमओ श्री एच.एम रावत द्वारा बताया गया कि प्रायः रूक-रूक कर वर्षांत होने से और जगह-जगह जल का भराब होने से मच्छरों के उत्पत्ति स्थल भी बढ़ जाते है, जिससे मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुन्या, जीका बुखार फाइलेरिया, जापानी दिमागी बुखार जैसे रोग बढ़ने की संभावना अधिक हो जाती है। इनसे बचाव के लिए अपने घर के आस पास जल का भराव न होने दें। पानी के बर्तन, टंकी, आदि ढककर रखे। पषुओं, पक्षियों केा पानी पिलाने वाले बर्तन, गमलों के पानी, फव्वारों के पानी, कूलर आदि के पानी प्रति सप्ताह खाली कर पुनः भरें। ऐसा करने से मच्छर के लार्वा पैदा नहीं होगे। साथ ही मिट्टी के तेल, जला हुआ तेल आदि माह में एक बार पानी से भरें गढ्ढों नालियों में डाले। हैण्डपंप के आस पास भरें जल की निकास बनावें। दरवाजों पर मच्छर रोधक जाली लगावे। शाम को नीम की पत्ति का धुआॅ मच्छर क्वाइल आदि के साथ सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग अवष्य करें और दिन में पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें क्योंकि विषेष रूप से डेंगू बुखार फैलाने वाले ऐडीज मच्छर दिन के समय ही काटते है।

