टीकमगढ़ । आजकल पावन नवदुर्गा महोत्सव का समय चल रहा है जिसके चलते क्षेत्र में मां जगदंबे जगत जननी की पूजा अर्चना में भक्त लींन है और माता रानी की सेवा भक्ति कर रहे हैं इस महोत्सव के चलते अंचल भर में जगह-जगह मां दुर्गा की झांकियां सजाई गई है और पंडालों में मां दुर्गा की मूर्तियों को स्थापित किया गया है जहां रोजाना भक्त सुबह-शाम पहुंचकर माता रानी के दर्शन पूजन कर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं। जहां पूरा अंचल महोत्सव के चलते धर्ममय हो रहा है इसी महोत्सव के चलते क्षेत्र के देवी मंदिरों में भी भक्तों की अपार भीड़ रोजाना पहुंच रही है और माता रानी को जल चढा़कर पूजा अर्चना कर भक्त अपनी अपनी मनौतियां माता रानी से मांग रहे हैं जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर सिद्ध शक्तिपीठ बगाज माता मंदिर पर रोजाना भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और भक्त पहुंचकर माता रानी के दरबार में अपनी अर्जियां लगा रहे हैं और उनसे अपने मन की मनोतियां मांग रहे हैं इस पावन अवसर पर क्षेत्र भर से भारी संख्या में भक्त बगाज माता मंदिर पहुंच रहे हैं और इस पावन नवदुर्गा महोत्सव का पूण्य-लाभ कमा रहे हैं। उल्लेखनीय है की बगाज माता मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है जहां माता रानी की असीम कृपा भक्तों पर बरसती है और यहां पहुंचने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।,,,,,,,, यह है माता रानी की असीम कृपा,,,,,,,,,,, बगाज माता मंदिर मे विषैले कीड़ों जैसे कि सांप बिच्छू गोयरे या कोई जानवर जैसे कि कुत्ता लड़ईया और अन्य भी आदि के काटे सताए हुए लोगों को ठीक करतीं हैं जहां इस प्रकार के सताए हुए पीड़ित लोगों पालतू गाय भैंस आदि पशु जब माता रानी के दरबार में पहुंचते हैं तो वह अपने आप ठीक हो जाते हैं केवल माता रानी के मंदिर की परिक्रमा कर जय बगाजमाता के जय कारे लगाने से ही ऐसे विषैले कीड़ों से काटे हुए सताए हुए पीड़ित लोग एवं पशु ठीक हो जाते हैं एवं पीड़ित उठकर बैठ जाते हैं और चल देते हैं ऐसी अपार कृपा माता रानी की यहां दिन रात बरसती है।,,,,,,,,कोई झाड़फूंक और तंत्र टोटका नहीं—– हम आपको यह भी बता दें कि बगाज माता मंदिर में कोई भी व्यक्ति विशेष द्वारा किसी भी प्रकार की झाड़फूंक या तंत्र टोटका नहीं किया जाता है केवल माता रानी के मंदिर परिसर में पहुंचने और माता रानी के मंदिर की परिक्रमा कर जय बगाज माता के जयकारे लगाने से ही पीड़ित अपने आप ठीक हो जाता है जिसे माता की भभूति लगाई जाती है और माता रानी की कृपा उस पर हो जाती है। और यहां जो भी करती हैं सभी माता रानी की ही कृपा होती है।