टीकमगढ़। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बदलते हुए मौसम,ऋतुओं के परिवर्तन का प्रभाव समस्याएं समाधान एवं सुझाव विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित था एवं डॉ इन्द्रजीत जैन की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस सेमिनार के मुख्य अतिथि डॉक्टर के एल जैन, पूर्व क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग एवं विशिष्ट अतिथि डॉ बी एस राजपूत पूर्व प्राचार्य शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय टीकमगढ़ रहे। सेमिनार के संयोजक डॉ ए. बी. खरे, आयोजन सचिव डॉ राम मनोहर अहिरवार, सह आयोजन सचिव डॉ अमर प्रकाश पाण्डेय एवं कोआर्डिनेटर डॉ रूपेश कुमार लुहारिया रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया इसके बाद सेमिनार संयोजक डॉ आनन्द भूषण खरे द्वारा सभी अतिथियों एवं रिसोर्स परसंस वाचकों का स्वागत किया गया। तत्पश्चात कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ राम मनोहर अहिरवार ने सेमिनार के महत्व से सभी को अवगत कराया एवं बताया की ऋतुओं का परिवर्तन सभी प्रकार के बदलाव के लिए ज़िम्मेदार होता है इसी कारण महाविद्यालय द्वारा सेमिनार हेतु इस विषय को चुना गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ के एल जैन ने कहा मनुष्य प्रकृति के साथ जैसा व्यवहार करेगा प्राकृति का व्यवहार वैसा ही होगा इसलिए सभी को प्रकृति के साथ सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथी एवं कीनोट स्पीकर डॉ बी एस राजपूत ने कहा कि मौसम केवल कृषि पर ही नहीं बल्कि खानपान, रहन-सहन, कल्चर, मकान, पहनावा, क्रियाकलाप आदि भी प्रभावित होते हैं। मनुष्य अपनी सुविधाओं के लिए बहुत से ऐसे कार्य करता है जिससे पर्यावरण में प्रतिकूल परिवर्तन हो रहे हैं अतः हमें ऐसे कार्य करने से बचना चाहिए। इस सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ इन्द्रजीत जैन ने अनेकान्तवाद का वर्णन करते हुए कहा हर कार्य को सिर्फ़ अपने लिए ही नहीं दूसरे के नज़रिए से भी देखना चाहिए हर व्यक्ति में विभिन्न प्रतिभाएँ होती है तथा सभी को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रयास करना चाहिए। इसके बाद तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया इसमें कृषि महाविद्यालय से डॉक्टर ए.के. श्रीवास्तव वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक ने मौसम को बदलने वाले कारकों एवं इसके प्रभावों का वर्णन किया। डॉक्टर अंशुमन सिंह वैज्ञानिक रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झाँसी में कृषि पर मौसम का प्रभाव एवं जिनेटिक सिक्वेंसिंग के बारे में बताया। डॉक्टर राकेश चैधरी वैज्ञानिक वैज्ञानिक केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झाँसी ने ऑयल सीड्स क्रॉप्स और मौसम का प्रभाव के बारे में बताया। तत्पश्चात अरविंद कुमार द्विवेदी सहायक प्राध्यापक मंदसौर विश्वविद्यालय ने भी कृषि पर मौसम का प्रभाव एवं निवारण के बारे में बताया। राष्ट्रीय सेमिनार में कुल 110 लोगों ने पंजीयन कराया साथ ही 07 वक्ताओं ने अपना वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर रजनी रॉय ने किया एवं आभार डॉक्टर प्रतीक्षा चैबे ने दिया। कार्यक्रम में डॉ विजय शाक्य, डॉ हरिमोहन राय, डॉ मुकेश कुमार अहिरवार, डॉ प्रेमलता, डॉ आस्था द्विवेदी आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस दौरान प्राध्यापक डॉ बी के नायक, डॉ के सी जैन, डॉ शशि प्रभा जैन, डॉ नसीम ख़ान, डॉ इंदरपाल सिंह, डॉ प्रियंका देवी, डॉ स्तुति झा आदि उपस्थित रहे।
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