टीकमगढ़। रविवार के दिन जिला मुख्यालय पर स्थित जिले के पहले प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, आरोग्यधाम में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ हर्षित तिवारी द्वारा बताया गया कि प्रकृति के पंच महा तत्वों का प्रचुर मात्रा मे प्रयोग कर, रोग का निदान किया जाता है। बिना किसी साइड इफेक्ट्स के रोग की जड़ पर काम, प्रकृति स्वयं करती है, बस आवशकता है, शरीर को ऐसा परिवेश देने की, जहां शरीर और प्रकृति का आपस में टकराव ना हो। अनेकों सुविधाएं, अनेकों पद्धति विकसित होने के बाद भी आज रोग पैर पसारते जा रहे है, बीपी और शुगर के बाद, आज कैंसर और ह्रदय घात , अत्यंत आम हो चुका है, और आने वाले समय में ऐसी और भी घातक बीमारियां , बहुत आम हो जाएंगी, ऐसा क्या गलत हो रहा है, ऐसे सवाल उठाए गए और उनका निदान चर्चा में रखा गया । आपका शरीर ही मात्र आपकी अपनी निजी परिसंपत्ति देनदारी है, इसकी सही देखभाल करना और इसके आरोग्य होने के लिए प्रतिबद्ध होना पड़ेगा ऐसा निश्चय लिया गया, सही पानी , उचित ताप तत्व , शुद्ध वायु , पृथ्वी और मिट्टी की शरण और अनुकूल वातावरण ही मानव शरीर के सच्चे घटक हैं, साथ ही आरोग्य धाम में प्राकृतिक और जैविक उत्पादों का निर्माण , जिसमे वैदिक धूप बत्ती और , हर्बल मच्छर अगरबत्ती का निर्माण कराया जाता है , और इसे बनाने में , उपचाररत रोगियों की सहायता ली जाती है , ताकि वे मानसिक स्वास्थ्य लाभ भी ले सके, गौ माता और गौ वंश का पालन और उनके प्रदत्त उत्पादों को भी उपचार में प्रयोग किया जाता है, चूल्हे पर बना, मिट्टी के पात्र में पका और पत्तलों में परोसा हुआ भोजन ही जमीन पर बैठा कर सभी को दिया जाता है, जिसके महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।प्रतिदिन सभी का अग्निहोत्र हवन में सम्मिलित होना भी अनिवार्य है। जिससे हवन कुंडी में डाली गई, औषधियां, नसिका द्वारा शरीर में प्रविष्ट हो और विषैले तत्व बाहर निकले ।प्रतिदिन सुबह योग , प्राणायाम, ध्यान और साधना का अभ्यास भी उपचार पद्धति में सम्मिलित है ताकि स्वास्थ के साथ एक अच्छे व्यक्तित्व का भी निर्माण हो सके।
इसके अतिरिक्त डॉ. तिवारी द्वारा बताया गया कि केंद्र पर उपचार के लिए, 6 तरह के काढ़े, 4 तरह के फलों के रस, अंकुरित अनाज, मोटे अनाज का भोजन, भरपूर सलाद और भरपूर फलों के साथ दिया जाता है, ताकि शरीर को रोगों से लड़ने में सहजता हो । 12 तरह की उपचार थैरेपी की सुविधा भी उपलब्ध है। जिसमें पानी , मिट्टी , भाप , वाइव्रेशन , एक्यूप्रेशर , मालिश , पंचकर्म , वमन, रक्त शुद्धि आदि शामिल हैं । सुबह उठने से लेकर रात सोने तक , शरीर को प्रकृति के अनुरूप सुचारू , समयबद्ध करना , इस चिकित्सा का सिद्धांत है, जो आरोग्य धाम में उपलब्ध है । साथ ही उन रोगियों से भी मिलवाया गया। जिनका इलाज दूसरी पद्धतियों में असंभव हो चुका था और कुछ तो मृत्यु के निकट थे, परंतु आज वे पूर्ण स्वस्थ है। यह चमत्कार नहीं, प्रकृति के पंच तत्वों की शक्ति है, जिसे अपनाना और समझना आज के कठिन समय में अत्यंत आवश्यक हो चुका है।
यह हुए स्वस्थ्य : इस पद्धति से अब तह स्वस्थ्य हुए रोगियों में रश्मि पुत्रीा सीताराम खंगार निवासी बड़गांव रोग ब्रेन ट्यूमर स्टेज 4, पायल पुत्री रामदीन सोनी निवासी विदिशा रोग डायबिटीज टाइप 1 , इन्सुलिन डिपेंडेंट, हिना आयु 12 वर्ष रोग मस्तिष्क ज्वर निवासी टीकमगढ़ आदि के नाम शामिल हैं । जिन्होंने इस उपचार विधि से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया है।