नर्मदापुरम/प्रीति चौहान/हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक मास आता है जिसे शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है। जानिए शरद पूर्णिमा का मुहूर्त और पूजा विधि। श्रीकृष्ण-राधा के साथ समस्त प्राणियों को शरद पूर्णिमा का बेसब्री से इंतजार होता है। क्या देवता, क्या मनुष्य, क्या पशु-पक्षी, सभी साथ नृत्य कर रहे हैं, मधुर संगीत में। चंद्र देव पूरी 16 कलाओं के साथ इस रात सभी लोकों को तृप्त करते हैं। आकाश में एकक्षत्र राज होता है इस दिन उनका। 27 नक्षत्र उनकी पत्नियां हैं- रोहिणी, कृतिका आदि। रातभर उनकी मुस्कराहट संगीतमय नृत्य करती हैं। जड़-चेतन, सब के सब मंत्रमुग्ध। राधा के एकनिष्ठ कृष्ण इस बात को जानते थे। इसलिए इसी दिन उन्होंने खेला महारास। गोपियां विरह में थीं, तो आश्विन शुक्ल पक्ष में चंद्रदेव उन्हें और विरह प्रदान कर रहे थे। आश्विन पूर्णिमा हुई और किसी तरह गोपियों का दिन बीता। रात हुई तो चंद्र देव ने अपना जादू चलाया और उधर से बांसुरी की मनमोहक तान। इस महारास का श्रीमद्भागवत में मनमोहक वर्णन भी है। देवी-देवताओं में होड़ लगी है। सब विमान में सवार होकर एकटक देख रहे हैं। गोपियों के ऐसे भाग्य से चंद्रदेव और उनकी सभी पत्नियां बार-बार गोपियों के जन्म को ही सार्थक मान रही हैं। हां, अपने को धन्य मान भी रही हैं कि भगवान की लीला में उनका भी योगदान है। भगवान धीरे-धीरे नाच रहे हैं। गोपियां गा रही हैं । इस दिन को रास पूर्णिमा और कौमुदी महोत्सव भी कहते हैं। महारास के अलावा इस पूर्णिमा का अन्य धार्मिक महत्व भी है, जैसे शरद पूर्णिमा में रात को गाय के दूध से बनी खीर या केवल दूध छत पर रखने का प्रचलन है। ऐसी मान्यता है कि चंद्र देव के द्वारा बरसायी जा रही अमृत की बूंदें खीर या दूध को अमृत से भर देती है। इस खीर में गाय का घी भी मिलाया जाता है। इस रात मध्य आकाश में स्थित चंद्रमा की पूजा करने का विधान भी है, जिसमें उन्हें पूजा के अन्त में अर्ध्य भी दिया जाता है। भोग भी भगवान को इसी मध्य रात्रि में लगाया जाता है। इसे परिवार के बीच में बांटकर खाया जाता है प्रसाद के रूप में, सुबह स्नान- ध्यान-पूजा पाठ करने के बाद। लक्ष्मी जी के भाई चंद्रमा इस रात पूजा-पाठ करने वालों को शीघ्रता से फल देते हैं। अगर शरीर साथ दे, तो अपने इष्टदेवता का उपवास जरूर करें। इस दिन की पूजा में कुलदेवी या कुलदेवता के साथ गणेश और चंद्रदेव की पूजा बहुत जरूरी है। कहते हैं शरद पूर्णिमा की रात भगवान कृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था। इसमें हर गोपी के साथ एक कृष्ण नाच रहे थे। गोपियों को लगता रहा कि कान्हा बस उनके साथ ही थिरक रहे हैं। अत: इस रात गोपीकृष्ण मंत्र का पाठ करने का महत्व है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्व होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस रात्रि में चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। आज शरद पूर्णिमा के दिन रात को करें ये आसाम काम, मां लक्ष्मी के प्रसन्न होने की है मान्यता है हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का खास महत्व है। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस साल शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर, रविवार को है। धार्मिक आस्था के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत की वर्षा होती है। शरद पूर्णिमा से ही सर्दियों की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा करके व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात कुछ आसान उपायों को करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। जानें शरद पूर्णिमा की रात कौन-से करें उपाय-
आप आज रात महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जागरण करें। कहा जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति लक्ष्मी सूक्त का पाठ, कनकधारा स्त्रोत, विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करते हैं उन्हें मां धन-धान्य से संपन्न करती हैं।
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