प्रदीप गुप्ता/नर्मदापुरम/ इस साल विश्व में चार ग्रहण है जिस में दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्रग्रहण भारत में एक ही सूर्य ग्रहण और एक ही चन्द्र ग्रहण दृश्य होगा। सूर्य ग्रहण को एक खगोलीय घटना माना जाता है। लेकिन इसका ज्योतिष से भी गहरा संबंध है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं एक सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्र ग्रहण। ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि के दिन होता है और चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्रमा की रात यानी कि पूर्णिमा के दिन होता है। कहा जाता है कि अमावस्या के दिन सूर्य पर ग्रहण लगने से इसका प्रभाव कुछ राशियों पर भी पड़ता है। लोक विजय पंचांग के अनुसार साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर कार्तिक कृष्ण अमावस्या मंगलवार को स्वाति नक्षत्र व तुला राशि में ग्रस्तास्त खंडग्रास सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि, ये सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला पहला सूर्य ग्रहण है। यह ग्रहण आंशिक रहेगा और भारतीय समय अनुसार 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 23 मिनट से शुरू होगा और यह सूर्य ग्रहण 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। पंडित शुभम दुबे (शास्त्री जी) के अनुसार इस बार ये संयोग है कि इस बार दीवाली की रात से ही सूर्य ग्रहण सूतक आरंभ हो जाएगा।
दिवाली इस साल 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। लेकिन इस साल की दिवाली बेहद खास होने वाली है। क्योंकि दिवाली पर सूर्य ग्रहण का साया है। पंडित दुबे ने बताया की दरअसल सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि को लगता है और दिवाली भी अमावस्या तिथि पर होती है। अबकी बार दिवाली पर ऐसा संयोग बना है कि दिवाली की रात से ही सूर्य ग्रहण का सूतक आरंभ हो जाएगा। इस ग्रहण का सूतक 4 प्रहार पहले अर्थात सोमवार रात्रि 4:23 से लगेगा किंतु बालक वृद्ध रोगी को एक पहर पूर्व अर्थात दिन में 1:23 से मारना चाहिए यह ग्रहण स्वती नक्षत्र तुला राशि पर लग रहा है। अतः स्वती नक्षत्र तुला राशि वालों के लिए विशेष अनिष्टकारी रहेगा कर्क वृश्चिक व मीन राशि वालों को अशुभ रहेगा एवं मेष मिथुन कन्या व कुंभ राशि वालों को मध्य रहेगा तथा वृषभ सिंह धनु और मकर राशि वालों को शुभ फल कारक रहेगा।
दिवाली की रात महानिशीथ काल
दिवाली की रात को साधन के लिए बहुत ही उत्तम माना गया है। इस समय देवी काली की साधना, उपासना, तंत्र साधना की जाती है। महानिशीथ काल ग्रहण का सूतक लग जाने से तंत्र साधना और सिद्धि के लिए यह रात बेहद खास रहेगी। इस रात जागरण करके देवी लक्ष्मी के मंत्रों का जप करना बेहद ही लाभ कारी होगा। इस ग्रहण का स्पर्श दिन में 4:23, मध्य 5:28, मोक्ष शाम 6:25, सूर्यअस्त शाम 5:39 पर
पर्व कल दो घंटा 2:02 मिनट रहेगा।
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