टीकमगढ़। किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यगण डॉ. जया श्रीवास्तव एवं डॉ. हरिहर यादव के द्वारा जिला जेल में निरुद्ध बंदियों में से ऐसे बंदियों की जाँच की गई जो कथित आपराधिक घटना के समय 18 वर्ष से कम आयु के हों और समुचित आयु जाँच किए बिना गलती से या लापरवाही से जेल में निरुद्ध हो गए हों। जेल में निरुद्ध समस्त बंदियों तथा जेल स्टाफ को इस संबंध में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि उक्त अधिनियम किशोरों के लाभ के लिए बनाया गया है और किशोर होने का दावा किसी भी स्टेज पर किया जा सकता है। यदि किसी भी व्यक्ति का आपराधिक मामला वयस्कों के न्यायालय में चल रहा है और उसे ज्ञात होता है कि कथित आरोपित अपराध 18 वर्ष से कम आयु के दौरान किया गया था तो ऐसा व्यक्ति अपनी आयु के संबंध में समुचित दस्तावेज, मेडिकल जाँच के माध्यम से आयु संबंधी गणना करा सकता है। यदि उसकी आयु कथित आरोपित अपराध के समय 18 वर्ष से कम आयु की साबित हो जाती है तो ऐसा मामला किशोर न्याय बोर्ड को अंतरित कर दिया जाता है और जेल में निरुद्ध बंदी को जेल से निकालकर समुचित बाल देख-रेख संस्थानों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दंडित कर दिया जाए और उसे जेल भेज दिया जाए तो नाबालिग होने का दावा ऐसे दंडादेश होने के बाद भी किया जा सकता है। यदि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा समुचित आयु जाँच किए बिना कथित आपराधिक घटना के समय नाबालिग रहे व्यक्ति को बालिग मानकर वयस्कों के लिए स्थापित न्यायालय में, गिरफ्तार करके पेश कर दिया जाता है तो जानबूझकर ऐसी लापरवाही या चूक करने वाले पुलिस अधिकारी के विरुद्ध किशोर न्याय बोर्ड द्वारा आपराधिक मामला दर्ज किए जाने तथा समुचित कार्यवाही किए जाने का आदेश दिया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान विधि सह परिवीक्षा अधिकारी श्री भारत भूषण झां तथा जेल अधीक्षक श्री यजुवेंद्र वाघमारे भी उपस्थित रहे। इसके बाद निरीक्षण टीम के द्वारा वन स्टॉप सेंटर का भी भ्रमण किया गया वहां भी व्यवस्था्एं संतोषजनक पायी गयीं।

