


नर्मदापुरम / मोहर्रम पर्व पर बड़ी सवारी फ़ाज़िल मंज़िल के पास आज़ाद इस्लामिया कमेटी के द्वारा आल इंडिया नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया कमेटी के सदर गुलाम मुस्तफ़ा ने बताया एक शाम इमाम हुसैन के नाम ज़िक्रे शोहदाए क़र्बला प्रोग्राम मे हिन्दुस्तान के मशहूर शायरो ने इमाम हुसैन की शहादत पर बयान कि करबला के मैदान मे पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने हक़ और सच के लिए अपने दीन को बचाने यज़ीद के सामने सर कटा दिया लेकिन सर झुकाया नही था। इसी संदेश से दुनिया में इस्लाम कायम है और यज़ीद का नामो निशान नही है। कार्यक्रम में मशहूर शायर शादाब व पैकर कोलकाता ने पढ़ा “फातिमा तेरी चादर का क्या पूछना तेरी चादर के टुकड़े 72 हुए, उन 72 का अहसान है इस्लाम पर” इसी क्रम मे छिंदवादा के नईम मोईन यासिनी ने कलाम ” हुसैन जैसा शहीदे आज़म जहाँ मे कोई हुआ नही है, छुरी के नीचे गला है लेकिन किसी से कोई गिला नही है” आवाम के सामने पढ़े मुफ़्ती ए शहर शमीम अख्तर ने आवाम से मुख़ातिब होते हुए कहा के इमाम हुसैन ने अपना सर देकर राहे हक़ मे इबादत को बचा लिया यज़ीद की हुकूमत को नकार दिया जिन्होंने अपनी ज़िंदगी बक्श दी बन्दगी को और अपने दीन की आबरू बचाकर सजदे मे अपनी गर्दन कटा ली अपना घर बार सब लुटा दिया अपने 6 माह के नन्हें बच्चे मासूम असगर को भी राहे हक़ मे शहीद कर दिया साथ 72 लोगो ने करबाला के मैदान मे अपनी शहादत देकर पूरी आलम ए इंसानियत को पैगाम दे गये।
कार्यक्रम में नायब काज़ी अलीम साहब, हाजी मसूद एड., वाहिद सेठ, फैज़ान उल हक़, गुलाम हैदर , पप्पू जादूगर, रिज़वान खान, मोहम्मद शाकिर, महताब ताजी, मो. जावेद, हाजी मुक़ीत, गुलाम हुसैन, गुलाम अली, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद अली, मोहम्मद उमर, पंकज नामदेव, फैज़ान खान, नूर मोहम्मद, गुलाम मोहम्मद, जाबिर, गुलशेर आदि उपस्थित थे।
Contact info : narmadasamay@gmail.com / +917974372722

