

नर्मदापुरम / अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा मां नर्मदा के तट पर स्थित नर्मदापुरम केंद्रीय जेल में 450 कैदी भाइयों द्वारा ली गई गुरु दीक्षा। कैदियों ने गुरु दीक्षा में दुष्प्रवृत्तियों को छोड़कर सत्प्रवृत्तियों को अपनाने का संकल्प लिया। केंद्रीय जेल नर्मदापुरम में खण्ड अ में 190 बंदियों ने एवं खण्ड ब में 260 बंदियों ने गायत्री मंत्र की दीक्षा लेकर अपने जीवन को संवारने का संकल्प लिया। पूर्व में दोनों जेलों में गायत्री परिवार द्वारा सतसाहित्य पुस्तकालय की स्थापना की गई थी, जिसमें गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सत साहित्य की स्थापना की गई थी एवं बंदियों द्वारा मंत्र लेखन अभियान के अंतर्गत करोड़ मंत्रों के लेखन का कार्य किया जा चुका है। जेल अधीक्षक संतोष सोलंकी ने बताया कि मैं जब जब भी जेल का भ्रमण करता हूं तब तब बंदी यहां मंत्र लेखन करते हुए या स्वाध्याय करते हुए दिखते हैं। इस प्रकार के गायत्री परिवार द्वारा चलाए जा रहे बंदी साधना अभियान से हमारे सैकड़ो बंदी पुरुष एवं महिला निरंतर शांतिपूर्वक साधना कर आपस में मिलजुल कर रहते हैं, ऐसा प्रतीत होता है यह जेल परिसर ना होकर साधना स्थली के रूप में नजर आता है। इसके लिए मैं गायत्री परिवार की पूरी टीम को हृदय से बधाई व धन्यवाद देता हूं। गायत्री परिवार द्वारा बंदी साधना अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र की 145 जेलों में हजारों बंदियों को मंत्र लेखन एवं गायत्री मंत्र साधना से जोड़कर उनके जीवन को परिवर्तित कर सन्मार्ग पर चलाने का कार्य किया जा रहा है। गायत्री परिवार द्वारा विभिन्न राज्यों की 62 जेलों में सतसाहित्य पुस्तकालय की स्थापना की जा चुकी है। जिससे हजारों बंदी सतसाहित्य का स्वाध्याय कर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं। गायत्री परिवार से कार्यक्रम में परिजन प्रेमलाल कुशवाहा, बनै सिंह दाँगी, मनोहर सिंह दांगी, राम नारायण लेवे, यशपाल कुशवाहा माखन नगर से परिजन उपस्थित रहे। डॉक्टर रमेश खंडेलवाल, महेश खंडेलवाल, सुरेश अग्रवाल, देवी सिंह राजपूत, राजेंद्र सिंह राजपूत उपस्थित रहे। जेल विभाग से संतोष सोलंकी, जेल अधीक्षक योगेश शर्मा, सहायक जेल अधीक्षक, हितेश बंडिया, ऋतुराज सिंह दांगी जेलर एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
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