टीकमगढ़ । कांग्रेसी नेता पवन घुवारा ने प्रेस को प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि आज एक यह प्रश्न हर जागरूक नागरिक के मन में उठता है आख़िर ऋण देने वाली एजेंसियों को हमारा मोबाइल नंबर, नाम और अन्य निजी जानकारी कहाँ से प्राप्त होती है? यह एक प्रकार की डेटा दलाली है जिसमें व्यक्ति की निजता को मूल्यवान वस्तु मानकर नीलाम किया जाता है। जहाँ दिन-रात मोबाइल पर ऋण प्रस्ताव भेजते हैं, आपको कभी किसी सरकारी बैंक से तत्काल ऋण की सुविधा का फोन नहीं आता, जबकि निजी बैंक आपको ग्राहक से अधिक लाभदायक अवसर के रूप में देखते हैं। क्या यह कॉल मानसिक उत्पीड़न नहीं है?यह प्रश्न अब केवल विचार का विषय नहीं रहा यह वास्तविक अनुभव बन चुका है। अधिकांश लोग दिन में चार-पाँच बार अनचाही कॉल्स से परेशान रहते हैं। बस एक दस्तावेज़ दीजिए और आज ही राशि प्राप्त कीजिए आपका ऋण पहले से स्वीकृत है, बस अंतिम चरण बाकी है इन कॉल्स को ठुकराने पर भी चैन नहीं मिलता। एक नंबर बंद किया तो दूसरा फोन आने लगता है। कृपया मुझे परेशान न करें सेवा डीएनडी सक्रिय करने के बावजूद ये कॉल्स आती रहती हैं। यह एक प्रकार की वित्तीय मानसिक हिंसा है। इसके पीछे एक बड़ा और संगठित तंत्र है विभिन्न माध्यमों से हमारे निजी विवरण एकत्र करती हैं और फिर इन्हें कई बार खुले बाज़ार में विक्रय कर देती हैं। वर्ष 2023 में ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक’ पारित किया था। इसके अनुसार, किसी भी संस्था को आपकी अनुमति के बिना आपका व्यक्तिगत डेटा उपयोग करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। किन्तु व्यवहार में यह विधेयक आज भी कागज़ों तक ही सीमित है। ना तो कॉल्स रुके हैं, न ही डेटा की दलाली थमी है। नागरिकों की निजता मात्र एक हास्यास्पद अवधारणा बनी रहेगी विचारणीय स्थिति है।

