टीकमगढ़ । पुलिस अधीक्षक श्री मनोहर सिंह मंडलोई के निर्देशन में जिले में मुश्क़ान अभियान चलाया जा रहा है जिसमें नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी के साथ जागरूकता कार्यक्रम भी सक्रिय रूप से किए जा रहे हैं ।
इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक द्वारा जिले में नाबालिगों संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु जागरूकता अभियान अंतर्गत आज यह एडवाइजरी नाबालिगों एवं उनके परिजनों हेतु जारी की जा रही है सभी से अपेक्षा है वे इसकी गंभीरता को समझेंगे एवं बताए गए निर्देशों का पालन करेंगे । टीकमगढ़ जिला बुंदेलखंड के उन जिलों में आता है जहाँ रोजगार के अवसर सीमित हैं। यहाँ बड़ी संख्या में परिवार जीविका के लिए महानगरों में मजदूरी करने जाते हैं, जबकि नाबालिग बालिकाएँ गाँव में दादा-दादी, रिश्तेदार या पड़ोसी की देखरेख में रहती हैं।
इस स्थिति का फायदा कुछ असामाजिक युवक उठाते हैं वे नज़दीकी क्षेत्रों से होकर गाँव में आते हैं, और बालिकाओं को बहला-फुसलाकर “शहर में पढ़ाई, नौकरी और अच्छे जीवन” के झूठे सपने दिखाकर साथ ले जाते हैं। महानगरों में पहुँचकर, ये बालिकाएँ कठिन मजदूरी करने को मजबूर हो जाती हैं और तब उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है। मुश्क़ान अभियान का उद्देश्य ऐसे मामलों को रोकना, अपृहत नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित वापस लाना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है।——-परिजनों हेतु सावधानियाँ——निगरानी और संवाद–बालिका के विद्यालय, मित्रों, आने-जाने के समय और मार्ग की जानकारी रखें।,यदि आप बाहर काम करते हैं, तो गाँव में रह रहे संरक्षक को बालिका की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से सौंपें।,मोबाइल या वीडियो कॉल के माध्यम से सप्ताह में कई बार सीधा संवाद करें।—–स्थानीय सतर्कता—–गाँव या आसपास के युवकों पर नज़र रखें, विशेषकर वे जो बार-बार शहर जाते हैं और लड़कियों को नौकरी या बेहतर जीवन के सपने दिखाते हैं।,किसी भी संदिग्ध बातचीत, घूमना-फिरना या नाबालिग के अचानक अनुपस्थित होने पर तुरंत पुलिस या ग्राम पंचायत को सूचना दें।—–जागरूकता और शिक्षा——बेटियों को गाँव में ही सिलाई, बुनाई, कंप्यूटर, हस्तशिल्प जैसे कौशल विकास कार्यक्रमों में जोड़ें, ताकि रोजगार के लिए उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता कम हो।—-नाबालिग बालिकाओं हेतु सावधानियाँ,बहकावे से बचाव—-शहर में आसान पैसा, फैशनेबल जीवन या बड़ी नौकरी के वादे अक्सर झूठ होते हैं। परिचित युवक या रिश्तेदार के साथ भी बिना माता-पिता की अनुमति कहीं न जाएँ।—आत्म-सुरक्षा— अजनबियों से दोस्ती या मोबाइल,सोशल मीडिया पर बातचीत न करें।,कभी भी अपना घर का पता, स्कूल का नाम या व्यक्तिगत फोटो साझा न करें।—संकट में कदम—
यदि कोई बहलाने, डराने या ज़बरदस्ती ले जाने का प्रयास करे तो जोर से शोर मचाएँ और सुरक्षित स्थान पर जाएँ।
पुलिस हेल्पलाइन 100 और चाइल्ड हेल्पलाइन *1098* का नंबर हमेशा याद रखें।—परिजन और बालिकाओं के संयुक्त निर्देश—खुला संवाद बनाए रखें,हर छोटी-बड़ी बात पर खुलकर चर्चा करें। पहचान दस्तावेज़ सुरक्षित रखें*— आधार, स्कूल आईडी, जन्म प्रमाणपत्र की प्रतियाँ अलग सुरक्षित स्थान पर रखें। संदेहास्पद गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करें देरी न करें, समय पर सूचना ही सुरक्षा है।
पुलिस द्वारा नाबालिगों के विरुद्ध अपराध को रोकने हेतु किए जा रहे प्रयास पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया है कि बे मुश्क़ान अभियान के तहत ग्राम स्तर पर ग्राम सुरक्षा समिति, पंचायत और आंगनबाड़ी के सहयोग से जागरूकता बैठकों का आयोजन करें एवं निम्न कार्यवाही जो पुलिस द्वारा पूर्व से की जा रही है उन्हें सक्रियता पूर्वक संचालित करें ऐसी नाबालिगों को चिन्हित कर रजिस्टर में पूरी जानकारी रखी जा रही है जो अकेली या माता पिता के बिना रिश्तेदार के यहां या परिजनों के यहाँ रह रही है । ग्रामों में ऐसे चिह्नित स्थानों की नियमित पुलिस द्वारा पेट्रोलिंग की जा रही है ।
क्षेत्र की चिह्नित नाबालिगों से समय-समय पर पुलिस द्वारा जागरूक किया जा रहा है । स्कूलों ,कोचिंगों के बाहर पुलिस की पेट्रोलिंग बड़ाई जा रही है । स्कूल,कोचिंग के शिक्षकों को संदिग्ध परिस्थितियों की सूचना देने हेतु पाबंद किया गया है । ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों , शिक्षक, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नाबालिग की अनुपस्थिति की सूचना तुरंत पुलिस को देने हेतु पाबंद किया गया है । विद्यालयों में नाबालिग बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण एवं साइबर सुरक्षा जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं ।—-चेतावनी संदेश—-शहर के झूठे सपनों के पीछे मत भागो — सुरक्षित भविष्य गाँव में, अपने परिवार के साथ है। सतर्कता ही सुरक्षा है, और सुरक्षा ही हर बेटी की मुस्कान की गारंटी है।
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