टीकमगढ़। बिना मां-बाप की बेटी और बेटा का लालन पालन कर रहा उनका नाना जबकि इन दोनों बिन मां -बाप के बच्चों के नाना की उम्र भी उस पड़ाव पर है कि वह अपने लिए ही कुछ नहीं कर सकते तो इस बेटी और बेटे का फिर लालन-पालन कैसे हो? जी हां हम बात कर रहे हैं नगर टीकमगढ़ के पपौरा चौराहा की घटिया के ऊपर पुरानी टेहरी पुल के पास निवासरत हरचरण कड़ा की, जो स्वयं की जिम्मेवारी अपनी इस उम्र के पड़ाव में नहीं उठा पा रहे हैं फिर उन्हें अपनी नातिन-नाती की चिंता भी उनके लालन पालन और नातिन की बीमारी की दिन रात सता रही है हर चरण कड़ा का कहना है कि मेरा सारा जीवन राजनीति में निकला है और मैं पूरे समय भाजपा में रहा हूं भाजपा जनसंघ के संस्थापक सदस्य रहे हरचरण कड़ा का यह कहना है कि आज मेरी मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है मेरी नातिन जिसकी उम्र करीब 16 वर्ष की है और एक नाती भी है जो नातिन निशा रैकवार से छोटा है जहां नातिन बीमार भी रहती है जिनके खाने पीने की में व्यवस्था नहीं जुटा पा रहा हूं ऊपर से उसकी बीमारी जिसका में इलाज भी नहीं करा पा रहा हूं इस हालत में रह रहे हरचरण कडा़ ने अपनी व्यथा जब प्रेस को सुनाई तो उनकी आंखों में आंसू भर आए जब उनसे पूछा गया कि भाजपा की पार्टी और भाजपा के नेताओं ने आपकी मदद नहीं की तो उनका जवाब नहीं में था, उनका कहना था कि मैंने भाजपा के कई नेताओं को बताया भी लेकिन मदद नहीं की मदद करने का आश्वासन जरूर मिला लेकिन कोई आगे नहीं आया ना किसी ने कोई मदद की है। जब इस परिवार की जानकारी समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणीय रूप से कार्य कर रही नगर की मानवीय संवेदना समिति को लगी तब मानवीय संवेदना समिति के सचिव मनीराम कठैल तुरंत उस घर पर पहुंचे और उन्हें पता लगा कि हर चरण कड़ा की नातिन निशा ने दो दिन से खाना नहीं खाया तब श्री कठैल ने होटल से लाकर उस बेटी को खाना खिलाया उसके बाद वह तुरंत खाने पीने की सामग्री आटा, दाल, नमक ,मिर्च आदि लेकर पहुंचे और उस बेटी के नाना हर चरण कड़ा को दिए मनीराम कठैल ने प्रेस को यह भी बताया कि मैं इनके खाने पीने की और भी व्यवस्था एक-दो दिन में करूंगा जो राशन पानी इन्हें मै दूंगा। उल्लेखनीय है कि एक तरफ तो भाजपा सरकार हर गरीब, हर असहाय , और लाचार व्यक्तियों के पास कोनें-कोनें तक पहुंचने और उसकी हर संभव मदद करने की बात करती है लेकिन वहीं भाजपा में ही अपना जीवन गुजारने वाले हरचरण कड़ा आज इस पड़ाव पर हैं कि उनके पास स्वयं के लिए रोटी खाने के लिए व्यवस्था नहीं है उसके बाद भी बिना मां-बाप के दो बच्चों का लालन पालन उनकी और उनकी नातिन जो बीमार भी रहती है अब इस हालत में श्री कड़ा की कोई मदद करने आगे नहीं आ रहा है लेकिन मानवीय संवेदना समिति ने अपनी संवेदनाओं और अपनी कार्य प्रणाली को अग्रसर करते हुए इस पीड़ित परिवार की सुध ली है अब देखना यह है कि इस लाचार और पीड़ित व्यक्ति के लिए कौन-कौन आगे आता है। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।