टीकमगढ़। मध्यप्रदेश में संविदा कर्मियों का संघर्ष वर्षों से जारी है। सरकारें बदलीं, घोषणाएँ हुईं, लेकिन समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं। हाल ही में संविदा संयुक्त संघर्ष मंच ने मुख्यमंत्री को दो पन्नों का ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें पुनः रखीं। यह ज्ञापन सिर्फ औपचारिक कागज नहीं, बल्कि लाखों संविदा कर्मचारियों की पीड़ा का दस्तावेज है।
सरकार की घोषणाएँ और हकीकत का फासला
4 जुलाई 2023 को मुख्यमंत्री ने पंचायतों में संविदा कर्मियों को लेकर बड़े ऐलान किए थे। इसके बाद 22 जुलाई 2023 को सामान्य प्रशासन विभाग ने संविदा नीति 2023 जारी की।
लेकिन इस नीति में—
हर साल अनुबंध की प्रक्रिया समाप्त करने का वादा गायब था।
ढाई दशक की सीनियरिटी खत्म कर दी गई।
नियमित कर्मचारियों जैसा महंगाई भत्ता और अवकाश नहीं दिया गया।
कई विभागों में नीति लागू ही नहीं हो पाई।
ई-गवर्नेंस, सामाजिक न्याय, विकलांग पुनर्वास केंद्र और कृषि विभाग (आत्मा प्रोजेक्ट) जैसे विभाग आज भी नीति से वंचित हैं।
संविदा कर्मियों की प्रमुख मांगें
संविदा संयुक्त मंच ने ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखीं—
जिन विभागों में नीति लागू नहीं हुई, वहाँ एकसाथ लागू करने की तारीख तय की जाए।
65 वर्ष तक का एकमुश्त अनुबंध किया जाए।
नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता, अवकाश और चिकित्सा सुविधा मिले।
भर्ती में 50% पद सीनियरिटी के आधार पर भरे जाएं।
10 वर्ष से अधिक कार्यरत संविदा कर्मियों का नियमितीकरण शुरू किया जाए।
प्रशासनिक लापरवाही और ठंडे बस्ते की राजनीति
ज्ञापन में कहा गया कि विभागीय स्तर पर संविदा नीति का क्रियान्वयन नहीं हुआ। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार की घोषणाएँ अक्सर कागज़ तक ही सीमित रह जाती हैं और अफसरशाही उन्हें ठंडे बस्ते में डाल देती है। यही कारण है कि संविदा कर्मियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
समाज पर असर
1995 से शुरू हुई संविदा व्यवस्था आज राज्य की व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। ई-गवर्नेंस, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, नगरीय निकाय सहित अनेक विभागों में संविदा कर्मियों की संख्या नियमित कर्मचारियों से अधिक है।
जब ये कर्मचारी असुरक्षा में रहेंगे तो सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।
सरकार की अग्निपरीक्षा
विधानसभा चुनावों के दौरान सरकार ने संविदा कर्मियों को स्थायी करने का वादा किया था। लेकिन अब चुनाव बीतने के बाद कर्मी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलेगा।
ज्ञापन सौंपने वाले पदाधिकारी
संयुक्त मंच जिला संयोजक जीवन शर्मा, पीएचई से प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप खरे, मनरेगा संघ जिला अध्यक्ष मनीषा धतरा, योगेश समाधिया, सोशल ऑडिट संघ से जिला अध्यक्ष कपिल जैन, ई-गवर्नेंस एम्प्लाइज यूनियन से प्रदेश अध्यक्ष अनुपम दीक्षित, जिला अध्यक्ष आशीष जैन, आजीविका मिशन जिला अध्यक्ष गिरीश सोनी, खेल विभाग जिला अध्यक्ष अनूप मंडल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष रफीक खान, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण कर्मचारी संघ से राजेश कुम्भकार सहित सैकड़ों संविदा कर्मचारी उपस्थित रहे।

