
नर्मदापुरम / मातृ और नवजात सुरक्षा को सुदृढ़ करने के संकल्प से प्रेरित राष्ट्रीय समरक्षण सम्मेलन 30–31 अगस्त को कोच्चि में आयोजित किया गया। अखिल भारतीय रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन (IRIA) की समरक्षण पहल गर्भवती महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया (उच्च रक्तचाप) और शिशु-विकास संबंधी जोखिमों की त्वरित पहचान के लिए तिमाही जाँच प्रक्रिया पर आधारित है। इस तिमाही-विशिष्ट स्क्रीनिंग कार्यक्रम में प्रत्येक गर्भावस्था की प्रथम, द्वितीय और तृतीय तिमाही में अल्ट्रासाउंड एवं डॉपलर परीक्षण शामिल किए जाते हैं, ताकि संभावित समस्याएँ समय रहते चिन्हित हो सकें और उचित इलाज किया जा सके, समरक्षण के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार इस पहल से प्रीटर्म प्रीक्लेम्पसिया और समयपूर्व प्रसव की दरों में महत्वपूर्ण कमी आई है, साथ ही नवजात शिशुओं का औसत जन्म-भार बेहतर हुआ और मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है, जो 2030 के सतत विकास लक्ष्यों से भी बेहतर है। IRIA के आंकड़ों के मुताबिक Samrakshan के पहले दो वर्षों में किए गए प्रयासों ने देश में परिनैटल मृत्यु दर में आश्चर्यजनक कमी दिखाई है। सम्मेलन में समरक्षण कार्यक्रम के प्रयासों के 9 वर्षों की सफलता को मनाया गया और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा की गई। डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा स्वास्थ्य संगठनों ने मिलकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल के नए तौर-तरीके अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान राष्ट्रीय समन्वयक एवं प्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अकांक्षा बघेल हरदा को उनके नेतृत्व और क्षेत्रीय कार्यों के लिए समरक्षण योद्धा 5-स्टार रिकॉग्निशन से सम्मानित किया गया। समरक्षण ने मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं। इस पहल की पहुंच बढ़ाकर देश के हर जिले में विशेषज्ञ नियुक्त करने की योजना है।

