

नर्मदापुरम / शास्त्र कहते हैं कि डोल ग्यारस के पारायण और वामन द्वादशी के प्रारंभ में जिसका निर्वाण होता है वह सीधे बैकुंठ धाम जाता है। ऐसे भजनानंदी, ग्रहस्त साधक जिन्होंने गृहस्थ जीवन में ईश्वर की उपासना करते हुए परोपकारी जीवन व्यतीत किया ऐसे श्री सी एल सोनी दिनांक 04/09/2025 को पंचतत्व में विलीन हो गए। विदित है कि शिक्षा विभाग में श्री सी एल सोनी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं था। ईमानदारी कार्य कुशलता एवं कठोर परिश्रम में से शिक्षा विभाग में अपनी पहचान स्थापित करने वाले श्री सोनी की हस्तलिपि पूरे विभाग में प्रशंसा का विषय थी। वरिष्ठ लेखपाल के पद पर पदस्थ श्री सोनी ने अपने परिवार के पालन पोषण एवं बच्चों की शिक्षा में अवरोध उत्पन्न ना हो इसलिए कई प्रमोशन को अस्वीकार कर दिया। अपनी कर्तव्य निष्ठा और कार्य कुशलता से विभाग को आकर्षित किया और संपूर्ण सेवाकाल नर्मदापुरम में व्यतीत किया। श्री सी एल सोनी की कार्य कुशलता को देखकर वर्ष 2009 में सेवानिवृत्ति के दिन ही शासन ने उनकी सेवा वृद्धि की और वर्ष 2018 तक उन्होंने पुनः शासन को अपनी सेवा प्रदान की। शासन उनके कार्यकाल से प्रसन्न होकर उनकी सेवाएं प्राप्त करता रहा किंतु ईश्वर उपासक श्री सोनी ने स्वेच्छा से वर्ष 2018 में सेवानिवृत्ति स्वीकार की। उनकी धर्मपत्नी श्री राधा सोनी के साथ बाकी का जीवन ईश्वर उपासना में व्यतीत किया और तीर्थ यात्राएं की। श्रीमती राधा सोनी का निधन वर्ष 2021 में हुआ दिनांक 04/04/2021 को श्रीमती राधा सोनी ने श्री हरि के चरणों में अपने प्राण त्यागे। श्रीमती राधा सोनी वरिष्ठ समाजसेवी और धार्मिक महिला थी और समाज के उनके परोपकारी स्वभाव से प्रत्येक व्यक्ति उनसे प्रभावित था। श्रीमती सोनी के बैकुंठ धाम के पश्चात श्री सी एल सोनी ने अपनी भक्ति से ईश्वर की उपासना करते हुए अपना जीवन व्यतीत किया। सरलता, सहजता और आत्मीयता से ओत प्रोत उनके परिवार में उनके दो पुत्र विशाल सोनी एवं विश्वास सोनी एवं पुत्री श्रद्धासोनी है। पुत्र, पुत्री, नातिन नाती से भरा पूरा परिवार हमेशा वट वृक्ष की शीतल छाया श्री सी एल सोनी के माध्यम से परिवार में प्राप्त होती रही। धर्म कर्म के समन्वय के प्रतीक श्री सी एल सोनी ने दिनांक 04/09/2025 को अंतिम सांस ली और मां नर्मदा के तट पर मुखाग्नि उनके दोनों पुत्र और पौत्र ने दी। श्री सोनी के मनमोहक व्यक्तित्व की चर्चा अभी संपूर्ण जनमानस में है। ईश्वर का संयोग है कि दोनों पति-पत्नी सी एल सोनी और श्रीमती राधा सोनी ने 4 तारीख को ही निर्वाण प्राप्त किया शास्त्र कहते हैं कि कर्मों के आधार पर अंतिम गति सुनिश्चित होती है। श्रीमती राधा सोनी एवं श्री सी एल सोनी दोनों बिना किसी कष्ट के देवलोक गमन किया। ऐसी पुण्य आत्मा को कई लोगों ने नम आंखों से अपनी श्रद्धांजलि प्रदान की। मां नर्मदा के पावन तट पर ऐसी पुण्य आत्मा को सभी लोग अपनी स्मृति में संजोए रखे हैं और उनके दिव्य व्यक्तित्व की चंहु और चर्चा में है

