
सोहागपुर / नगर में नजूल पट्टों के नवीनीकरण की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे नगर के 95 प्रतिशत लोग पीड़ित हैं। इस समस्या का मुख्य कारण यह है कि नगर के अधिकांश निवासियों के पास पुराने पट्टे उपलब्ध नहीं हैं, जो शासन द्वारा लीज नवीनीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज हैं।
*समस्या की जड़*
सोहागपुर नगर 1981-82 में नजूल घोषित किया गया था और तत्कालीन कमीश्नर सी. पी. बरार के नेतृत्व में सर्वे कराया गया था। हालांकि, वर्तमान में इस रिपोर्ट के संबंध में किसी को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और प्रशासन द्वारा एक लंबे समय तक इस मामले में कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
*परिणाम*
नागरिकों को नजूल पट्टों के नवीनीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करने में परेशानी हो रही है, जिसके कारण उन्हें व्यापार करने के लिए संपत्ति पर लोन बैंक के माध्यम से नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, शासन को करोड़ों रुपये के कर का नुकसान हो रहा है।
*प्रशासन की भूमिका*
प्रशासन द्वारा डोर टू डोर सर्वे कराने और नोटिस भेजकर आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन अधिकांश लोगों के पास पुराने पट्टे नहीं होने के कारण आवेदन लेना सिर्फ औपचारिकता होगी।
*समाधान की आवश्यकता*
प्रक्रिया को सरलीकरण करते हुए मूल पट्टे के बिना पुराने प्रकरण/खसरा नकल/रजिस्ट्री के आधार पर और आर.आई. पटवारी द्वारा स्थल पर पहुंचकर प्रतिवेदन की रिपोर्ट पर सभी लंबित लीज नवीनीकरण के मामलों को स्वीकार कर पट्टों की नवीनीकरण करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर शीघ्र निराकरण किए जाने की आवश्यकता है। इससे नगर के निवासियों को राहत मिलेगी और शासन को भी कर का नुकसान नहीं होगा।

