

सिवनी मालवा / दिगंबर मंगल भवन जैन मंदिर देवल मोहल्ला सिवनी मालवा में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन भोपाल से पधारे महाराज संत विद्याभूषण शास्त्री द्वारा गज ग्राह का युद्ध, समुद्र मंथन, वामन अवतार , राम अवतार एवं कृष्ण अवतार की कथा सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। महाराज जी ने कहा कि ईश्वर समस्त जीवों में निवास करता है इसलिए किसी को भी कष्ट देना ईश्वर को कष्ट देने के बराबर होता है।इसलिए सभी से प्रेम पूर्ण व्यवहार जीवन में करना चाहिए (ना जाने किस भेष में नारायण मिल जाए) राजा बलि के द्वार पर भगवान देवताओं के संकट को हरने के लिए एक याचक के रूप में गए भिक्षुक का रूप धारण करके जो अपने भक्तों के लिए याचक बन सकता है, खंभ फाड़कर नरसिंह रूप में आ सकता है। वह किसी भी रूप में आ सकता है, भक्तों के भाव के ऊपर निर्भर है कि वह ईश्वर को किस रूप में देखना चाहता है और कहां देखना चाहता है। भगवान अनेक रूप धारण करते हैं और अपने भक्तों को अत्याचारियों के अत्याचार से मुक्त करते हैं। समुद्र मंथन की कथा श्रवण कराते हुए महाराज द्वारा कहा गया कि यह हमारे जीवन के मंथन की कथा है हम जब मानव योनि धारण करते हैं तो हमारे जीवन में सुख भी आता है दुख भी आता है अच्छा भी होता है, बुरा भी होता है। जिस प्रकार समुद्र मंथन से 14 रतन की प्राप्ति हुई ऐसे ही हमारे जीवन में भी अनेकों बार समय अच्छा, बुरा आता है। लेकिन ईश्वर के आधीन जो जीव रहता है जो संपूर्ण समर्पण के साथ अपना जीवन भगवान के ऊपर विश्वास के साथ जीता है। उसके जीवन में कभी किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं आता। कलयुग में भागवत की कथा सुनने मात्र से हर प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी जन्मों के पापों का नाश होता है। राम जन्म एवं कृष्ण जन्म व बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। यह भी बताया कि 84 लाख योनियों में भटकने के पश्चात मानव शरीर की प्राप्ति होती है। जब- जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है तब तक प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब जब इस धरती पर गौ, ब्राह्मण , देवता और संतों पर अत्याचार हुआ, तब तब भगवान अनेक रूप धारण करके अपने भक्तों पर आए हुए संकट को दूर किया है। जब रावण का अत्याचार बढ़ा तब राम का अवतार हुआ । जब कंस ने सारी मर्यादाऐं तोड़ी तो प्रभु श्री कृष्ण का अवतार हुआ। कथावाचक पंडित विद्याभूषण शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिसे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है। भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है। कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा के साथ सुंदर झांकी का दर्शन भी कराया गया बड़े आनंदपूर्वक भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। कथा का आयोजन स्वर्गीय अवतार सिंह मौर्य की स्मृति में कोदर सिंह मौर्य, श्रीमती उर्मिला मौर्य एवं समस्त मौर्य (राजपूत) परिवार के द्वारा किया जा रहा है। सभी भक्तों से आयोजक परिवार के द्वारा आग्रह किया गया कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर सत्संग का लाभ प्राप्त करें । कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक है। वहीं भागवत कथा के आयोजन से श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है।

