
सिवनी मालवा / राठौर परिवार के द्वारा चल रही श्रीमद् भागवत कथा श्रीराम जानकी मंदिर में पंडित श्री निलेश जी उपाध्याय के द्वारा दिव्य भागवत कथा श्रद्धालुओं को श्रवण करवाई जा रही है। पंडित श्री के द्वारा भगवान की बाल लीलाओं की कथा एवं भगवान की माखन चोर लीला की कथा माखन अज्ञानता का प्रतीक है और कृष्ण इसे चुराकर जीवात्माओं को ज्ञान का प्रसाद देते हैं, जिससे वे अज्ञानता से मुक्त होते हैं। यह लीला भक्तों के प्रति प्रेम, चंचलता और भगवान की शरणागति द्वारा अज्ञानता से ज्ञान की ओर बढ़ने का संदेश देती है, जिससे जीवन में आनंद और शांति मिलती है।
अज्ञानता से मुक्ति:
माखन को अज्ञानता का प्रतीक माना जाता है। कृष्ण का माखन चुराना गोपियों को अज्ञानता से मुक्त कर ज्ञान का प्रसाद देने का प्रतीक है।
भक्ति और प्रेम: कृष्ण की चंचल लीला उनके प्रेम और अपने भक्तों के प्रति उनके वात्सल्य भाव को दर्शाती है। यह भक्तों को भगवान के साथ आनंदमय और चंचल प्रेम का अनुभव कराता है। ज्ञान की प्राप्ति: माखन चोरी का अर्थ है कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें भगवान कृष्ण की शरण में जाना चाहिए। वे ही हमें अज्ञानता और दुख से मुक्त कर सकते हैं और आनंद प्रदान कर सकते हैं।
ईश्वरीय शरणागति:
यह लीला सिखाती है कि अपने जीवन के आनंद और शांति के लिए भगवान कृष्ण की शरण में जाना आवश्यक है, क्योंकि वे ही अज्ञानता को दूर कर सकते हैं।
ईश्वर का सामिप्य:
माखन चोर लीला भक्तों और ईश्वर के बीच के घनिष्ठ संबंध को दर्शाती है, जहां भक्त अपने ईश्वर के साथ खेलते हैं और ईश्वर भी भक्तों के साथ ऐसी लीलाएं करते हैं। इस लीला के माध्यम से, भगवान भक्तों को ज्ञान, प्रेम और आनंद का मार्ग दिखाते हैं और अज्ञानता के बंधनों से मुक्त होने का संदेश देते हैं। कथा में गोवर्धन पूजन एवं 56 भोग लगाकर श्रद्धालुओं ने भगवान का पूजन किया।

